ITR में हेराफेरी पर 200% जुर्माना, तो दूसरी तरफ विदेश जाने वालों की बल्ले-बल्ले; पीएफ खाते में सीधे जमा होगा यूके से कटने वाला पैसा

कमाई छिपाई तो आयकर विभाग का चलेगा चाबुक; 15 जुलाई से लागू हो रहा भारत-यूके ऐतिहासिक समझौता, ब्रिटेन जाने वाले भारतीय पेशेवरों की बढ़ेगी टेक-होम सैलरी।

13 Jul 2026  |  1192

 

 

नई दिल्ली

टैक्स को लेकर बरती गई जरा सी भी लापरवाही या कमाई छिपाने की कोशिश अब करदाताओं की जेब पर बेहद भारी पड़ने वाली है। आयकर विभाग ने रिटर्न दाखिल करने में देरी और आय की हेराफेरी (टैक्स चोरी) को लेकर नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ गलत जानकारी देने पर भारी जुर्माने का प्रावधान है, वहीं दूसरी तरफ सरकार विदेश (ब्रिटेन) जाकर नौकरी करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक राहत की खबर लेकर आई है।

पार्ट 1: टैक्स चोरी और लेटलतीफी पर आयकर विभाग का कड़ा रुख

आयकर अधिनियम के तहत टैक्स चोरी या अपनी सही आमदनी को छिपाना एक गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। विभाग ने इसके लिए अलग-अलग धाराओं के तहत भारी पेनाल्टी तय की है:

अंडर-रिपोर्टिंग पर 50% जुर्माना: धारा 270A के तहत अगर कोई करदाता अपनी वास्तविक आय को कम बताता है, तो पकड़े जाने पर उसे छिपाई गई आय पर बनने वाले टैक्स का 50 फीसदी जुर्माना देना होगा।

मिसरिपोर्टिंग पर 200% जुर्माना: अगर यह साबित हो जाता है कि आपने जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है, फर्जी एंट्री की है या झूठे दावे किए हैं, तो यह जुर्माना बढ़कर टैक्स राशि का 200 फीसदी तक पहुंच जाएगा।

डेडलाइन चूके तो जेब होगी ढीली

लेट फीस: धारा 234F के अनुसार, तय डेडलाइन के बाद आईटीआर (ITR) फाइल करने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस लगेगी। (5 लाख रुपये से कम सालाना आय वालों के लिए यह राहत केवल 1,000 रुपये तक सीमित है)।

TDS/TCS में देरी: टीडीएस या टीसीएस स्टेटमेंट दाखिल करने में देरी पर धारा 234E के तहत 200 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना देय होगा।

अकाउंट बुक्स न रखने पर: बहीखाते (Books of account) मेंटेन न करने पर धारा 271A के तहत 25,000 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इसके अलावा, ऑडिट न कराने पर टर्नओवर का 0.5 फीसदी या अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।

पार्ट 2: ब्रिटेन जाने वाले भारतीयों के लिए खुशखबरी; 15 जुलाई से बदलेगा नियम

टैक्स के इन कड़े नियमों के बीच, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय पेशेवरों को एक शानदार तोहफा दिया है। आगामी 15 जुलाई से भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और ‘डबल कंट्रीब्यूशन कंवेंशन’ (DCC) पूरी तरह लागू होने जा रहा है।

पहले क्या था घाटा?

अब तक जब भारतीय पेशेवर 2 से 5 साल के छोटे असाइनमेंट पर काम करने ब्रिटेन जाते थे, तो उनकी सैलरी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा वहां के 'नेशनल इंश्योरेंस कंट्रीब्यूशन' (NIC) के नाम पर काट लिया जाता था। चूंकि यूके के नियमानुसार पेंशन का लाभ पाने के लिए कम से कम 10 साल वहां नौकरी करना अनिवार्य है, इसलिए 5 साल से पहले भारत लौटने वाले भारतीयों का यह कड़ा हुआ पैसा पूरी तरह डूब जाता था।

अब पीएफ (PF) खाते में बरसेगा पैसा और 8.25% ब्याज

नए 'डबल कंट्रीब्यूशन कंवेंशन' के लागू होने से यह विसंगति पूरी तरह खत्म हो जाएगी:

सीधे भारत में ट्रांसफर: जो भारतीय पेशेवर 5 साल तक की अवधि के लिए ब्रिटेन जाएंगे, उनकी सैलरी से कटने वाला वह 25 फीसदी हिस्सा अब ब्रिटिश सरकार के पास नहीं रहेगा।

PF में जमा: वह पूरी रकम सीधे भारत में उनके प्रोविडेंट फंड (PF) खाते में भेज दी जाएगी।

टैक्स-फ्री मुनाफा: भारत के पीएफ खाते में आने के बाद इस रकम पर कर्मचारियों को 8.25 प्रतिशत की दर से सुरक्षित और टैक्स-फ्री ब्याज मिलता रहेगा।

सरकार के इस कदम से न केवल विदेश में काम करने वाले भारतीयों की वर्तमान 'टेक-होम सैलरी' (हाथ में आने वाली कमाई) में भारी इजाफा होगा, बल्कि उनके भविष्य और परिवार की सामाजिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा और मजबूत रिटायरमेंट फंड भी तैयार होगा।

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