चकाचौंध से दरगाह की चौखट तक: रजनीकांत-कमल हासन की इस एक्ट्रेस का दर्दनाक अंत, आखिरी वक्त में शरीर पर रेंग रहे थे कीड़े

कभी बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर करने वाली निशा नूर की दास्तां; गुमनामी, मजबूरी और एड्स ने छीनी जिंदगी, मौत के बाद परिवार ने भी मोड़ा मुंह।

13 Jul 2026  |  1065

 

 

मनोरंजन डेस्क: फिल्मी दुनिया की चकाचौंध जितनी लुभावनी होती है, इसके पीछे का अंधेरा उतना ही खौफनाक हो सकता है। सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी त्रासदियां दर्ज हैं, जिन्हें सुनकर रूह कांप जाती है। ऐसी ही एक सबसे दर्दनाक और दिल को झकझोर देने वाली कहानी है 80 के दशक की मशहूर साउथ एक्ट्रेस निशा नूर की। साल 2007 में तमिलनाडु की एक दरगाह के बाहर वे जिस हाल में मिलीं, उसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री और इंसानियत को शर्मसार कर दिया था।

दरगाह के बाहर कंकाल बन चुका था शरीर

साल 2007 में तमिलनाडु के नागूर दरगाह के बाहर एक ऐसी महिला पाई गई जिसकी हालत देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। फटे-पुराने कपड़े, भूख से दम तोड़ता बेहद कमजोर शरीर और पूरे बदन पर कीड़े व चींटियां रेंग रही थीं। वहां से गुजरने वालों के लिए वह महज एक बेसहारा लाचार महिला थी, लेकिन जब उसकी असली पहचान सामने आई तो हर कोई सन्न रह गया। वह कोई साधारण महिला नहीं, बल्कि 12 साल पहले अचानक गायब हो चुकीं एक्ट्रेस निशा नूर थीं।

रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गजों के साथ किया काम

निशा नूर ने 1980 के दशक में तमिल सिनेमा से अपने करियर का आगाज किया था। अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अदाकारी के दम पर उन्होंने बहुत जल्द इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना ली। उन्होंने अपने करियर में रजनीकांत और कमल हासन जैसे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स के साथ स्क्रीन शेयर की। हालांकि, उन्हें ज्यादातर सपोर्टिंग रोल मिले, लेकिन दर्शकों के बीच उनका क्रेज कम नहीं था। 1980 से 1995 के बीच उन्होंने करीब 17 फिल्मों में काम किया और वे लगातार सुर्खियों में बनी रहीं।

ग्लैमर की भूख और मजबूरी ने धकेला बदनाम गली में

साल 1995 के बाद अचानक निशा को फिल्मों के ऑफर मिलने बंद हो गए। धीरे-धीरे उनके पास काम और पैसे दोनों खत्म हो गए। चकाचौंध भरी जिंदगी की आदी हो चुकीं निशा जब आर्थिक तंगी से पूरी तरह टूट गईं, तो कुछ लोगों ने उन्हें गलत रास्ता दिखाया।

पैसों की सख्त मजबूरी के कारण उन्होंने वेश्यावृत्ति के दलदल में कदम रख दिया। इस बदनाम दुनिया में कदम रखते ही उनका फिल्म इंडस्ट्री और अपने परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया। उनके पिता के अनुसार, फिल्मों की सफलता के बाद ही उन्होंने परिवार से दूरियां बना ली थीं।

"जब निशा नूर को एक सामाजिक संस्था के पास ले जाया गया, तो उन्होंने खुद अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई कि कैसे फिल्मों से दूर होने के बाद वे मजबूरी में इस दलदल का हिस्सा बन गईं।"

एड्स की बीमारी और अपनों की बेरुखी ने ली जान

संस्था द्वारा अस्पताल ले जाए जाने पर डॉक्टरों ने जांच में पाया कि निशा नूर एड्स (AIDS) जैसी जानलेवा बीमारी की आखिरी स्टेज पर थीं। उनका शरीर महज हड्डियों का ढांचा रह गया था। डॉक्टरों और संस्था की तमाम कोशिशों के बावजूद, अस्पताल में भर्ती होने के महज एक हफ्ते के भीतर उन्होंने दम तोड़ दिया।

इस कहानी का सबसे क्रूर मोड़ उनकी मौत के बाद आया। जब निशा नूर के निधन की खबर उनके परिवार को दी गई, तो समाज के डर या बेरुखी के कारण परिवार का कोई भी सदस्य उनका शव लेने नहीं आया। आखिरकार, जिस सामाजिक संस्था ने उन्हें आखिरी वक्त में सहारा दिया था, उसी ने पूरे रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।

निष्कर्ष: पर्दे पर लाखों दिलों को धड़काने वाली एक खूबसूरत अदाकारा का ऐसा गुमनाम और खौफनाक अंत यह सोचने पर मजबूर करता है कि सफलता की चमक जितनी तेज होती है, असफलता का ढलान उतना ही जानलेवा हो सकता है।

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