'ICC की ईंट से ईंट बजा देंगे' — अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय को खुली चेतावनी

ट्रंप प्रशासन का अब तक का सबसे आक्रामक रुख; दुनिया भर के देशों से ICC का साथ छोड़ने, फंडिंग रोकने और अदालत को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की अपील।

14 Jul 2026  |  1119

 

 

वाशिंगटन:

अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के बीच का टकराव अब आर-पार की जंग में बदल चुका है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हेग स्थित इस वैश्विक अदालत को पूरी तरह खत्म करने की खुली धमकी दी है। रुबियो ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर "ICC की एक-एक ईंट उखाड़ फेंकेगा।"

अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) अब पूरी ताकत से दुनिया भर की सरकारों पर यह दबाव बना रहा है कि वे इस अदालत का साथ छोड़ दें, वरना उन्हें अमेरिकी प्रतिबंधों और कड़े कूटनीतिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा।

 "कानून के नाम पर अमेरिका से युद्ध लड़ रहा है ICC"

'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' में लिखे अपने एक तीखे लेख में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आईसीसी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

"ICC अमेरिका के खिलाफ गोलियों या मिसाइलों से नहीं, बल्कि 'अंतरराष्ट्रीय कानून' की आड़ लेकर छद्म युद्ध (Proxy War) लड़ रहा है। यह अदालत अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अमेरिका और उसके सबसे करीबी सहयोगियों (जैसे इजरायल) को दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बना रही है।"

रुबियो ने आरोप लगाया कि इस वैश्विक अदालत पर कुछ वामपंथी गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), वैश्विक समूहों और कुछ विकासशील देशों का कब्जा हो चुका है, जो सिर्फ अमेरिका विरोधी एजेंडा चला रहे हैं।

 कैसे ICC को घुटनों पर लाएगा अमेरिका?

सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने आईसीसी को कूटनीतिक और आर्थिक रूप से पंगु बनाने के लिए एक 'ग्लोबल ब्लूप्रिंट' तैयार किया है:

फंडिंग पर रोक: अमेरिका उन सभी सदस्य देशों से अपील कर रहा है कि वे आईसीसी को दी जाने वाली सालाना आर्थिक मदद तुरंत रोक दें।

सदस्यता छोड़ने का दबाव: वाशिंगटन अपने राजदूतों के जरिए दुनिया भर की सरकारों से आईसीसी की सदस्यता (Rome Statute) वापस लेने की मांग कर रहा है।

प्रतिबंधों का हंटर: जो देश आईसीसी के अधिकारियों का समर्थन करेंगे, अमेरिका उनके वीजा रद्द कर सकता है, उनकी यात्राओं पर रोक लगा सकता है और उन पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध भी थोप सकता है।

 साथ न देने वाले देशों को 'डोनेशन' रोकने की धमकी

अमेरिका ने उन विकासशील देशों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है जो एक तरफ अमेरिका से भारी आर्थिक या सैन्य मदद (Financial Aid) लेते हैं और दूसरी तरफ आईसीसी का समर्थन करते हैं। ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ऐसे दोहरे रवैये वाले देशों को अब अमेरिकी जांच और सख्त दबाव का सामना करना पड़ेगा।

 पुराना है टकराव का इतिहास

अमेरिका और आईसीसी के बीच यह तल्खी नई नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही यह विवाद तब गहराया था जब आईसीसी ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों द्वारा किए गए कथित 'युद्ध अपराधों' की जांच शुरू करने की कोशिश की थी। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह दुश्मनी और उग्र हो गई है, विशेषकर तब से जब अदालत ने इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों (जैसे ईरान और अल सल्वाडोर से जुड़े मामले) को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए जांच के दायरे में लाने का प्रयास किया।

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