पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की सरगर्मियों के बीच जनशक्ति जनता दल को एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन पत्र जांच के बाद रद्द कर दिया गया है। इस फैसले के आते ही सूबे की सियासत गरमा गई है। नामांकन खारिज होने की खबर मिलते ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव फौरन पटना कलेक्ट्रेट पहुंचे और निर्वाची पदाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली।
तेज प्रताप का गंभीर आरोप: 'यह एक सोची-समझी साजिश है'
निर्वाची पदाधिकारी से मुलाकात करने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए तेज प्रताप यादव बेहद हमलावर नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासन और विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी की उम्मीदवार के खिलाफ गहरी साजिश रची गई है।
"जानबूझकर हमारी उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन रद्द कराया गया है। यह लोकतंत्र की हत्या है। लेकिन हमें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। इस अन्याय के खिलाफ हम चुप नहीं बैठेंगे। हम जल्द ही अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी लड़ाई लड़कर न्याय हासिल करेंगे।" — तेज प्रताप यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, जनशक्ति जनता दल
गिरफ्तारी से लेकर नामांकन रद्द होने तक का पूरा घटनाक्रम
बांकीपुर उपचुनाव को लेकर पिछले दो दिनों से लगातार हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है। पूरे मामले की कड़ियां कुछ इस तरह जुड़ी हैं:
13 जुलाई (नामांकन दाखिल): वीणा मानवी ने जनशक्ति जनता दल की प्रत्याशी के रूप में बांकीपुर सीट से अपना पर्चा दाखिल किया।
नामांकन के बाद गिरफ्तारी: नामांकन फॉर्म भरने के तुरंत बाद पटना पुलिस ने एक पुराने मामले में कार्रवाई करते हुए वीणा मानवी को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के विरोध में उनके समर्थकों ने कलेक्ट्रेट के बाहर जमकर हंगामा भी किया था। हालांकि, देर शाम अदालत से उन्हें जमानत मिल गई थी।
हलफनामे में जानकारी छिपाने का लगा आरोप: सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नामांकन पत्र रद्द होने की मुख्य वजह हलफनामे में एक पुरानी कानूनी जानकारी का न होना है।
क्यों खारिज हुआ नामांकन?
निर्वाचन कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वीणा मानवी ने अपने नामांकन के साथ सौंपे गए शपथ पत्र (Affidavit) में अपने खिलाफ दर्ज एक पुराने आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई थी।
दरअसल, वर्ष 2009 के एक मामले (केस संख्या: 837/2009) में वीणा मानवी को पहले ही अदालत से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन नियमतः हलफनामे में इसका उल्लेख करना अनिवार्य था। इस तकनीकी त्रुटि और जानकारी छिपाने को आधार बनाते हुए निर्वाची पदाधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त करने का फैसला सुनाया।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में जनशक्ति जनता दल की साख दांव पर है, और सबकी नजरें अदालत के रुख पर टिकी हैं कि क्या वीणा मानवी को कानूनी लड़ाई से दोबारा चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिलता है या नहीं।