राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: ₹40 हजार से शुरू हुई कड़ियां, शौचालय में मिले नोटों ने खोला राज, 17 घंटे में उगल दिए ₹81 लाख!

शौचालय में मिले नोटों ने खोला राज; ट्रस्ट की सख्ती के आगे आरोपियों के परिजनों ने खुद लौटाई चोरी की रकम

15 Jul 2026  |  920

 

 

अयोध्या। राम मंदिर में आस्था के चढ़ावे पर हाथ साफ करने वाले गिरोह का एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने सुरक्षा से लेकर मंदिर की व्यवस्थाओं तक सबको झकझोर कर रख दिया है। जिस मामले की शुरुआत महज 40 हजार रुपये की बरामदगी से हुई थी, उसने अगले 17 घंटों के भीतर 81 लाख 19 हजार रुपये की भारी-भरकम बरामदगी का रूप ले लिया। ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय की कड़क कूटनीति और पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी के आगे आरोपियों के हौसले पस्त हो गए।

शौचालय में बिखरे नोट और चंपतराय का 'एक्शन प्लान'

इस पूरे खेल का पर्दाफाश बेहद नाटकीय ढंग से हुआ। 4 जून को राम मंदिर के शौचालय में जब एक गेटकीपर की नजर लावारिस पड़े नोटों पर पड़ी, तो हड़कंप मच गया। शौचालय से शुरुआती तौर पर 40 हजार रुपये बरामद हुए। गेटकीपर ने बिना देर किए इसकी सूचना तत्कालीन महासचिव चंपतराय को दी।

सूचना मिलते ही चंपतराय तुरंत मंदिर परिसर पहुंचे और सुरक्षा अधिकारियों के साथ ट्रस्टियों को तलब कर लिया। मंदिर परिसर को छावनी में बदलते हुए सभी संदिग्धों की मौके पर ही तलाशी ली गई। चंपतराय ने साफ कर दिया कि जब तक पाई-पाई का हिसाब नहीं मिल जाता, वह परिसर से टस से मस नहीं होंगे।

17 घंटे की मैराथन छापेमारी: बहराइच से प्रतापगढ़ तक रिकवरी

ट्रस्ट और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त मुस्तैदी रंग लाई। अगले 17 घंटों के भीतर अयोध्या, बहराइच के नानपारा और प्रतापगढ़ के कुंडा समेत कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई।

आरोपी रमाशंकर मिश्रा (नानपारा, बहराइच) और अविनाश शुक्ला (प्रतापगढ़) के पैतृक आवासों पर शिकंजा कसा गया।

इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा, उसके रिश्तेदार लवकुश, और नाका निवासी करुणेश की निशानदेही पर अलग-अलग जगहों से कुल 81 लाख 19 हजार रुपये की नकदी जब्त की गई।

परिजनों ने खुद सरेंडर की रकम: ट्रस्ट की कड़ाई और बदनामी के डर से घबराए कुछ आरोपियों के अभिभावक खुद चोरी की रकम के बैग लेकर मंदिर पहुंचे और उसे ट्रस्ट के सुपुर्द कर दिया।

चोरी कब से जारी थी? SIT खोलेगी राज

इस मामले में सबसे बड़ा रहस्य यह है कि चढ़ावे की यह चोरी कब से चल रही थी? चूंकि दानपात्र और गणना स्थल के सीसीटीवी कैमरों का बैकअप मात्र 45 दिनों का ही है, इसलिए डिजिटल सबूतों के आधार पर तह तक जाना एक बड़ी चुनौती है।

अब पूरा दारोमदार एसआईटी (SIT) की जांच पर है। पुलिस कस्टडी में आरोपियों के बयानों और गहन विवेचना के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आस्था के इस केंद्र से अब तक कुल कितने करोड़ रुपयों पर हाथ साफ किया जा चुका है।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर ट्रस्ट के पदाधिकारी और पुलिस के आला अधिकारी आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरखाने चल रही यह बड़ी कार्रवाई अयोध्या में चर्चा का गर्म विषय बनी हुई है।

अन्य खबरें