बिहार में शिक्षा क्रांति: सम्राट सरकार का बड़ा तोहफा, 211 नए डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन, पश्चिम चंपारण के 8 प्रखंडों को मिली सौगात

CM सम्राट चौधरी ने वर्चुअल माध्यम से किया शुभारंभ; अब ग्रामीण युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए नहीं करना पड़ेगा पलायन

15 Jul 2026  |  1119

 

 

बेतिया/पटना।

बिहार में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक कॉलेज शिक्षा की पहुंच आसान बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक साथ 211 नए राजकीय डिग्री कॉलेजों का वर्चुअल माध्यम से भव्य उद्घाटन किया। सरकार की इस बड़ी पहल के तहत पश्चिम चंपारण जिले को भी 8 नए डिग्री कॉलेजों की सौगात मिली है, जहां उद्घाटन के साथ ही आज से पठन-पाठन का कार्य भी विधिवत शुरू हो गया है।

पश्चिम चंपारण के इन 8 प्रखंडों में खुले नए कॉलेज

अब तक उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहरों पर निर्भर रहने वाले पश्चिम चंपारण के ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों के लिए यह फैसला किसी वरदान से कम नहीं है। जिले के इन 8 प्रखंडों में नए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों की शुरुआत की गई है:

मझौलिया

चनपटिया

योगापट्टी

बैरिया

ठकराहा

सिकटा

भितहा

पिपरासी

इन सभी महाविद्यालयों में पहले ही दिन से कक्षाएं शुरू होने के कारण स्थानीय छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

'हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज': आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को संबल

इस योजना का मुख्य उद्देश्य 'हर प्रखंड, एक डिग्री कॉलेज' के संकल्प को पूरा करना है। सरकार के इस निर्णय से सबसे ज्यादा लाभ उन बेटियों और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राओं को मिलेगा, जो पैसों की तंगी या सुरक्षा कारणों से शहरों में जाकर पढ़ाई करने में असमर्थ थे। अब वे अपने घर और गांव के नजदीक ही स्नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।

मझौलिया में जुटीं विधायक रेणु देवी, फैसले को बताया ऐतिहासिक

कॉलेजों के डिजिटल उद्घाटन के अवसर पर मझौलिया स्थित नवनिर्मित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक रेणु देवी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं।

समारोह को संबोधित करते हुए विधायक रेणु देवी ने कहा:

"मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह कदम बिहार के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने वाला है। अब हमारे गांव के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। वे अपने ही आंचल में रहकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करेंगे, जिससे उनका भविष्य उज्जवल होगा।"

बिहार के समग्र विकास में 'मील का पत्थर'

इस ऐतिहासिक पहल पर खुशी जाहिर करते हुए नवनिर्मित कॉलेज के प्राचार्य (प्रिंसिपल) मो. फिरोज आलम ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि जब गांव-गांव तक उच्च शिक्षा की रोशनी पहुंचेगी, तो न केवल साक्षरता और योग्यता का स्तर सुधरेगा, बल्कि यह मानव संसाधन बिहार के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

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