संसद का गणित बदला: दो-तिहाई बहुमत के करीब सरकार, शरद पवार गुट के रुख से बढ़ी हलचल, DMK-झामुमो कैसे पलट सकता है बाजी?

लोकसभा में सत्तापक्ष का आंकड़ा 332 तक पहुंचने के आसार; अब 22 सांसदों वाली डीएमके और छोटे दलों के फैसले पर टिकी देश की नजर।

15 Jul 2026  |  791

 

 

नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े आगामी संविधान संशोधन विधेयक को लेकर देश की सियासत में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। आगामी मानसून सत्र में पेश होने वाले इस बेहद महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंचती दिख रही है। राकांपा (एनसीपी - शरद पवार गुट) द्वारा विधेयक को समर्थन देने के मिल रहे संकेतों के बाद सत्तापक्ष की राह काफी हद तक आसान होती नजर आ रही है, जिससे विपक्षी खेमे में भी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।

लोकसभा का बदला गणित: 298 से 332 तक पहुंचा आंकड़ा

गौरतलब है कि बीते 17 अप्रैल को सरकार इस विधेयक पर आवश्यक संख्या बल जुटाने में विफल रही थी। तब सदन में मौजूद 528 सांसदों में से विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े थे, जबकि इसे पास कराने के लिए 352 मतों की दरकार थी।

लेकिन पिछले तीन महीनों में लोकसभा की राजनीतिक बिसात पूरी तरह बदल चुकी है:

टीएमसी में टूट के बाद बने 'नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) के 20 सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ आ चुके हैं।

शिवसेना (उद्धव गुट) के 6 सांसद पाला बदलकर शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो चुके हैं, जिससे विधेयक समर्थकों की संख्या 324 हो गई।

अब यदि एनसीपी (शरद पवार गुट) के 8 सांसद भी विधेयक के पक्ष में आते हैं, तो यह आंकड़ा सीधे 332 पर पहुंच जाएगा। हालांकि, यह अब भी 543 सदस्यीय लोकसभा में पूर्ण दो-तिहाई बहुमत (362) से 30 कम है।

किंगमेकर की भूमिका में DMK: भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें

अब सारा दारोमदार 22 सांसदों वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) जैसे छोटे क्षेत्रीय दलों के रुख पर टिक गया है। आईएनडीआईए (INDIA) गठबंधन से अलग हो चुकी डीएमके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया था। लेकिन बदलते राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा उसे साधने की पुरजोर कोशिश कर रही है। भाजपा रणनीतिकार डीएमके को '50 फीसदी सीटों की एकमुश्त बढ़ोतरी' का हवाला देकर मनाने में जुटे हैं।

क्या होगा यदि डीएमके पाला बदलती है या वॉकआउट करती है?

पक्ष में मतदान: यदि डीएमके विधेयक का समर्थन करती है, तो सत्तापक्ष का आंकड़ा 354 हो जाएगा, जो जीत के बेहद करीब होगा।

सदन से अनुपस्थिति (वॉकआउट): यदि डीएमके मतदान के समय सदन से अनुपस्थित रहती है, तो कुल सदस्यों की संख्या घटने से दो-तिहाई का कोरम घटकर 348 पर आ जाएगा। ऐसे में सरकार को महज 16 और मतों या कुछ अन्य विपक्षी सांसदों की अनुपस्थिति की जरूरत होगी, जिससे 332 के आंकड़े के साथ भी विधेयक पास कराया जा सकेगा।

मानसून सत्र में आर-पार की जंग के आसार

इस रणनीतिक उठापटक के बीच कांग्रेस को अब भी उम्मीद है कि मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र के बाद डीएमके अपना भाजपा-विरोधी रुख कायम रखेगी। बहरहाल, सरकार के बढ़ते संख्या बल और विपक्ष के भीतर मची इस रार से यह साफ है कि आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक कूटनीतिक मुकाबला देखने को मिलेगा।

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