PK को बड़ा झटका: जन सुराज के संस्थापक सदस्य और मशहूर गणितज्ञ प्रोफेसर KC सिन्हा BJP में शामिल, गणित के दिग्गज ने बदला पाला

कुम्हरार से चुनाव लड़ चुके गणित के दिग्गज ने बदला पाला; बोले– "करंट (सरकार) के साथ चलना ही समझदारी, राष्ट्रीय हित और शिक्षा को शिखर पर ले जाने के लिए थामा भाजपा का हाथ।"

15 Jul 2026  |  808

 

 

पटना। बिहार में बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव के बीच प्रशांत किशोर (PK) की 'जन सुराज पार्टी' (JSP) को एक बहुत बड़ा सियासी झटका लगा है। देश के जाने-माने गणितज्ञ, दर्जनों किताबों के लेखक और जन सुराज के संस्थापक सदस्यों में से एक, प्रोफेसर कृष्ण चंद्र सिन्हा (KC सिन्हा) ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। बुधवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक मिलन समारोह में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

"धारा के साथ चलने में ही भलाई" — सिन्हा ने समझाया राजनीति का 'गणित'

भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद प्रो. केसी सिन्हा ने जन सुराज से मोहभंग और भाजपा में शामिल होने की वजह को बड़े ही व्यावहारिक अंदाज में समझाया। राजनीति के 'गणित' पर बात करते हुए उन्होंने कहा:

"अगर आप करंट (धारा) के विपरीत चलते हैं, तो मंजिल तक पहुंचने में बहुत वक्त लगता है। लेकिन यदि आप करंट यानी सरकार के साथ चलते हैं, तो चीजें सुगम हो जाती हैं। इंसान को वक्त और धारा के साथ चलना चाहिए।"

संजय सरावगी ने कराया शामिल, कई अन्य बागी भी BJP में गए

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने प्रोफेसर केसी सिन्हा को पार्टी की सदस्यता दिलाई और उनका स्वागत किया। प्रो. सिन्हा के साथ ही जन सुराज के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके दो अन्य बड़े चेहरे— बिट्टू सिंह और गोपाल सिंह ने भी जन सुराज का साथ छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

बता दें कि प्रोफेसर केसी सिन्हा ने नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पटना की कुम्हरार सीट से जन सुराज के टिकट पर किस्मत आजमाई थी, हालांकि इस चुनाव में उन्हें करीब 15,000 वोट ही मिले थे।

"विश्व-गुरु के गौरव को वापस दिलाना ही लक्ष्य"

शिक्षाविद प्रो. सिन्हा ने कहा कि जन सुराज में रहते हुए भी उनका पूरा ध्यान शिक्षा के स्तर को सुधारने पर ही केंद्रित था। उन्होंने भारत के ऐतिहासिक गौरव को याद करते हुए कहा:

"भारत कभी शिक्षा के क्षेत्र में पूरे विश्व का मार्गदर्शन करता था। उस दौर में भी, जब परिवहन के साधन न के बराबर थे, विदेशों से दस हजार छात्र नालंदा विश्वविद्यालय पढ़ने आते थे। भारत को शिक्षा के क्षेत्र में फिर से उसी 'विश्व-गुरु' के शिखर पर पहुंचाने के संकल्प के साथ मैं भाजपा में शामिल हो रहा हूँ।"

वैश्विक चुनौतियों के बीच 'राष्ट्रीय हित' सर्वोपरि

दुनियाभर में जारी युद्ध और अशांति के माहौल का जिक्र करते हुए प्रो. सिन्हा ने केंद्र सरकार को और अधिक मजबूत करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया उम्मीद भरी नजरों से भारत की तरफ देख रही है, ऐसे समय में राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर है। देश को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों को मजबूत करके ही वैश्विक मंच पर भारत का प्रभाव और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने जाते-जाते प्रशांत किशोर को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

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