महाराष्ट्र में सियासी हलचल: परिसीमन विधेयक पर शरद पवार गुट के बदले सुर, सुप्रिया सुले ने रखी बड़ी शर्त

बिल पर बातचीत के दरवाजे खुले; सुप्रिया सुले बोलीं– 'महिला आरक्षण में मिले 50% हिस्सेदारी तो परिसीमन पर विचार को तैयार, पर नहीं होगा इंडिया गठबंधन से अलग फैसला।'

15 Jul 2026  |  740

 

 

मुंबई। संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले देश और महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े खेल के संकेत मिलने लगे हैं। अब तक परिसीमन (डिलिमिटेशन) और महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर मजबूती से विपक्ष के साथ खड़ी दिख रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के रुख में नरमी के संकेत मिले हैं। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले के एक ताजा बयान ने सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है कि क्या मानसून सत्र से पहले विपक्ष के भीतर कोई नया समीकरण आकार ले रहा है।

"मसौदा आए बिना न समर्थन, न विरोध" — सुप्रिया सुले

मुंबई में पार्टी सुप्रीमो शरद पवार, प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सुप्रिया सुले ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने परिसीमन विधेयक पर पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:

"जिस विधेयक का आधिकारिक मसौदा (Draft) अभी तक सामने ही नहीं आया है, उस पर समर्थन या विरोध की घोषणा करना जल्दबाजी होगी। हमारी पार्टी ने अभी तक इस प्रस्तावित बिल को न तो खारिज किया है और न ही इसका समर्थन करने का कोई अंतिम फैसला लिया है।"

उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को सबसे पहले परिसीमन का पूरा फॉर्मूला और इसकी प्रक्रिया को देश के सामने सार्वजनिक करना चाहिए।

शर्तों के साथ चर्चा को तैयार, दक्षिण भारत की चिंताओं का भी जिक्र

सुप्रिया सुले ने एक ऐसा बयान दिया जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर सरकार विपक्ष की मांगों पर विचार करे, तो एनसीपी (एसपी) का रुख सकारात्मक हो सकता है।

50% महिला आरक्षण की शर्त: सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि केंद्र सरकार महिला आरक्षण में 50 प्रतिशत की सीमा पर चर्चा करने के लिए तैयार होती है, तो उनकी पार्टी भी परिसीमन के मुद्दे पर आगे बात करने के लिए तैयार है।

दक्षिण के राज्यों का हित: इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय संतुलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के कारण दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को साफ करना होगा कि इससे राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व पर क्या असर पड़ेगा।

NDA को बाहर से समर्थन की खबरों को किया खारिज

हाल के दिनों में गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि शरद पवार की पार्टी संसद में एनडीए सरकार को इस ऐतिहासिक विधेयक पर बाहर से समर्थन दे सकती है। इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि पार्टी की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। किसी की निजी बातचीत को पूरी पार्टी का आधिकारिक रुख मान लेना सरासर गलत है।

इंडिया गठबंधन में दरार की संभावनाओं पर पूर्णविराम

जब सुप्रिया सुले से पूछा गया कि यदि सरकार उनकी शर्तें मान लेती है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस बिल का विरोध जारी रखती है, तब एनसीपी (एसपी) का क्या कदम होगा?

इस पर उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया:

"हमारी पार्टी अकेले कोई भी फैसला नहीं करेगी। एनसीपी (एसपी) पूरी मजबूती के साथ 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन का हिस्सा है। पहले सरकार का प्रस्ताव आने दीजिए, उसके बाद गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के साथ इस पर विस्तृत चर्चा होगी और फिर सामूहिक रूप से ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हमारी पार्टी में हर बड़ा फैसला शरद पवार जी के नेतृत्व में सामूहिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता है।"

मानसून सत्र में आर-पार के आसार

भले ही एनसीपी (एसपी) ने परिसीमन विधेयक पर अपना अंतिम पत्ता न खोला हो, लेकिन सुप्रिया सुले के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि सत्तापक्ष के लिए बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हैं। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है कि वह क्या मसौदा पेश करती है। निश्चित रूप से, आगामी मानसून सत्र में यह मुद्दा भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा रणनीतिक कुरुक्षेत्र बनने जा रहा है।

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