नई दिल्ली,
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्र में लगातार हो रहे हमलों के मद्देनजर भारत सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) ने बुधवार को एक आपातकालीन आदेश जारी करते हुए जहाज मालिकों, प्रबंधकों और भर्ती कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती तुरंत रोक दें।
हालिया हमलों में दो भारतीय नाविकों ने गंवाई जान
यह कड़ा फैसला पिछले तीन दिनों में इस अशांत समुद्री इलाके में कमर्शियल जहाजों पर हुए अलग-अलग हमलों के बाद आया है, जिसमें दो भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई थी। इन घटनाओं ने संघर्ष वाले क्षेत्र में काम करने वाले नाविकों के जीवन के जोखिम को अत्यधिक बढ़ा दिया है।
दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर है भारत सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत वैश्विक स्तर पर समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। वर्तमान में दुनिया भर के जहाजों पर 3,00,000 से अधिक भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा भारत सरकार के लिए सर्वोपरि चिंता बन गई है।
DGMA का सख्त निर्देश: 'अतिरिक्त सावधानी बेहद जरूरी'
बुधवार (15 जुलाई, 2026) को जारी किए गए आधिकारिक नोटिस में DGMA ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक कोई भी कंपनी भारतीय नाविकों को इस रूट पर तैनात नहीं करेगी।
डायरेक्टरेट ने अपने आदेश में कहा:
"फारस की खाड़ी इलाके में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, इस क्षेत्र में चलने वाले जहाजों पर काम कर रहे भारतीय नाविकों के हितों और जीवन की रक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने वाले उपाय अपनाना अनिवार्य हो गया है।"
सुरक्षा की चौबीसों घंटे निगरानी
नियामक ने सभी शिपिंग कंपनियों और जहाज मालिकों को फारस की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और उसके आस-पास के समुद्री मार्गों पर सुरक्षा स्थिति के प्रति बेहद सतर्क रहने को कहा है। साथ ही, नौवहन चेतावनियों (Navigation Warnings) की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
DGMA ने आश्वस्त किया है कि वह क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखे हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा व भलाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।