ट्रंप की नीति और रूस के डर-सुरक्षा की नई परिभाषा: अमेरिकी छाते से बाहर निकल यूरोप ने थामा यूक्रेन का हाथ, बनेगा अभेद्य 'महा-कवच'

क्रेमलिन की बढ़ी बेचैनी: डोनाल्ड ट्रंप की मनमानी और पुतिन के 'अंतिम दांव' ने यूरोप को किया आत्मनिर्भर, 10 देशों के महा-गठबंधन से हिलेगा मॉस्को!

16 Jul 2026  |  1144

 

 

पेरिस/ब्रसेल्स: वैश्विक सुरक्षा की बिसात पर दशकों पुरानी निर्भरता की दीवारें ढहने लगी हैं। अब तक रक्षा के लिए वाशिंगटन की ओर ताकने वाले यूरोप ने एक बेहद आक्रामक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। यूरोप के नौ प्रमुख देशों ने पेरिस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर अपने स्वतंत्र और एकीकृत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल गठबंधन की घोषणा कर दी है। इसी कड़ी में एक और बड़ा धमाका करते हुए बुधवार को यूरोपीय संघ (EU) और यूक्रेन ने मिलकर बड़े पैमाने पर आधुनिक ड्रोन बनाने के रणनीतिक समझौते पर भी मुहर लगा दी है।

यह कदम वैश्विक सैन्य संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है। दशकों से दुनिया की दो महाशक्तियों—अमेरिका (पश्चिमी देशों के लिए) और रूस (पूर्वी देशों के लिए)—ने रक्षा मानक तय किए हैं। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण जहां मॉस्को से हथियारों की आपूर्ति ठप है, वहीं अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की मनमानी नीतियों और यूरोप से सुरक्षा की कीमत वसूलने की धमकियों ने यूरोपीय देशों को अपनी राह चुनने पर मजबूर कर दिया है।

हथियारों की नई जुगलबंदी: क्या हैं ये दो महा-समझौते?

यूरोप और यूक्रेन के बीच हुए इन दो रक्षा करारों ने वैश्विक सैन्य विश्लेषकों को चौंका दिया है:

1. अंतरिक्ष में मिसाइल ढेर करेगा 'फ्रेया' और 'ब्लिक्सेम ईएक्सओ'

यूक्रेन और नौ यूरोपीय देशों ने मिलकर एक एकीकृत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल कवच विकसित करने का फैसला किया है। इसके तहत 'फ्रेया' (FREYJA) और 'ब्लिक्सेम एक्सो' (Bliksem EXO) कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।

रणनीति: रूस के मिसाइल हमलों का सामना करने का यूक्रेन का वास्तविक अनुभव और तकनीक, यूरोपीय देशों की रडार विशेषज्ञता, भारी फंडिंग और औद्योगिक क्षमता के साथ मिलकर काम करेगी।

लक्ष्य: अगले 12 महीनों के भीतर एक बेहद कम लागत वाली और बड़े पैमाने पर उत्पादित होने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली तैयार करना।

2. ईयू-यूक्रेन ऐतिहासिक ड्रोन डील

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कीव यात्रा के दौरान पूरे 27 ईयू देशों और यूक्रेन के बीच इस बड़े समझौते की घोषणा की।

इसके तहत यूक्रेन की युद्धक्षेत्र की ड्रोन व एंटी-ड्रोन तकनीक को यूरोप के सुरक्षित और विशाल औद्योगिक ढांचे में ले जाकर बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा।

रणनीतिक समीकरण: कौन साथ है, कौन बाहर?

गठबंधन में शामिल: यूक्रेन समेत कुल 10 देश इस मिसाइल कवच योजना का हिस्सा हैं।

कौन हैं बाहर?: रूस की सीमा के सबसे करीब स्थित पोलैंड, बाल्टिक देश और फिनलैंड फिलहाल भौगोलिक संवेदनशीलता या अन्य रणनीतिक कारणों से इसमें शामिल नहीं हुए हैं।

अमेरिका से दूरी: अमेरिका इस गठबंधन का सदस्य नहीं है। यूरोप महंगे अमेरिकी 'पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम' पर अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है, जिसकी वैश्विक आपूर्ति पहले से ही सीमित है।

यूरोप को क्यों उठाना पड़ा यह अप्रत्याशित कदम?

1. पुतिन का 'अंतिम दांव': यूक्रेन पर रूस लगातार इस्कंदर, किंजल और नई 'ओरेशनिक-क्लास' बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले कर रहा है। जेलेंस्की ने इसे पुतिन का आखिरी दांव बताया है। इसने पूरे यूरोप को सतर्क कर दिया है।

2. अंतरिक्षीय खतरा: मध्यम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर (अंतरिक्ष) जाकर हमला करती हैं। यूरोप के पास अब तक ऊपरी-परत (Upper-layer) के इस खतरे से निपटने का कोई स्वदेशी कवच नहीं था।

3. वाशिंगटन से मोहभंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यूरोप को रक्षा खर्च बढ़ाने की खरी-खरी सुना रहे थे। वहीं, अमेरिका खुद पश्चिम एशिया और अन्य मोर्चों पर व्यस्त है, जिससे हथियारों की आपूर्ति में अड़चनें आ रही हैं।

कैसे काम करेगा यह नया मिसाइल 'महा-कवच'?

यह स्वदेशी प्रणाली एक बहु-स्तरीय सुरक्षा चक्र के रूप में काम करेगी:

'हिट-टू-किल' तकनीक: दुश्मन की मिसाइल को नष्ट करने के लिए इसमें किसी पारंपरिक बारूद का इस्तेमाल नहीं होगा। यह प्रणाली अत्यधिक तीव्र गति से अंतरिक्ष में ही सीधे दुश्मन की मिसाइल से टकराकर उसे मलबे में तब्दील कर देगी।

पांच कंपनियों का महा-नेटवर्क: इस गठबंधन में शामिल 5 बड़ी यूरोपीय रक्षा कंपनियों की तकनीकें रडार और ट्रैकिंग को एक साथ जोड़ेंगी।

नाटो के साथ तालमेल: यह अमेरिकी पैट्रियट या फ्रांसीसी सैंप/टी (SAMP/T) को हटाएगी नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर काम करेगी। निचली परत की सुरक्षा मौजूदा सिस्टम करेंगे, जबकि ऊपरी वायुमंडल की सुरक्षा 'ब्लिक्सेम एक्सो' संभालेगा।

क्रेमलिन में हड़कंप: रूस पर क्या होगा इसका असर?

इस रक्षा गठबंधन की खबर मिलते ही रूसी खेमे में भारी बौखलाहट है।

पुतिन की धमकी: क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इसे 'भ्रमित देशों का गुट' कहा है। वहीं, राष्ट्रपति पुतिन ने धमकी दी है कि अगर रूस के तेल ठिकानों या रिफाइनरियों पर हमले हुए, तो वे कई गुना भीषण जवाबी हमला करेंगे।

75% तबाही का कारण बना ड्रोन: 'अटलांटिक काउंसिल' के अनुसार, युद्ध के मैदान में रूस को हुआ 75% से अधिक का नुकसान यूक्रेनी ड्रोनों के कारण हुआ है। यूक्रेन के समुद्री ड्रोनों ने रूसी 'ब्लैक सी फ्लीट' को क्रीमिया से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। अब यूरोप के सुरक्षित ठिकानों पर बनने वाले ड्रोन रूस के अंदरूनी सैन्य अड्डों और बॉम्बर बेड़ों को निशाना बनाएंगे।

तकनीकी और आर्थिक नाकेबंदी: रूस की सुस्त सैन्य नौकरशाही इस नई और तेज स्टार्टअप-आधारित तकनीक का मुकाबला नहीं कर पा रही है। इसके साथ ही यूरोप अब रूस के 'शैडो फ्लीट' (गुपचुप तेल बेचने वाले जहाजों) को ठप करने के लिए अपना 21वां प्रतिबंध पैकेज लाने की तैयारी में है, जिससे रूस की वॉर-मशीन को मिलने वाली फंडिंग पूरी तरह रुक जाएगी।

यूरोप का यह नया चक्रव्यूह यह साफ संदेश है कि अब वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी महाशक्ति का मोहताज नहीं रहेगा।

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