पटना: बिहार का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब केवल हार-जीत का अखाड़ा नहीं रह गया है, बल्कि यह सूबे की भावी सियासत और महागठबंधन के भविष्य की दिशा तय करने वाला लिटमस टेस्ट बन चुका है। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में मजबूती से लड़ने वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता इस बार चौतरफा चुनौतियों से घिर गई हैं। एक तरफ कांग्रेस की रहस्यमयी चुप्पी है, तो दूसरी तरफ जन सुराज के प्रशांत किशोर (पीके) ने मुख्य विपक्षी दल के रूप में राजद के वजूद को ही चुनौती दे डाली है।
1. कांग्रेस की चुप्पी और बिखरता सोशल इंजीनियरिंग का ताना-बाना
साल 2025 के नियमित विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की एकजुटता के दम पर रेखा गुप्ता ने लगभग 47 हजार वोट हासिल किए थे। उस वक्त कांग्रेस समर्थित सवर्ण मतदाताओं और वामदलों के समर्पित कैडर वोट ने राजद को मजबूती दी थी। साथ ही राजद ने भाजपा के पारंपरिक वैश्य वोट बैंक में भी बड़ी सेंध लगाई थी।
लेकिन इस उपचुनाव में परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। चुनाव प्रचार के बीच कांग्रेस और राजद के बीच चल रही 'आंख-मिचौली' ने कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल दिया है। कांग्रेस की यह चुप्पी राजद उम्मीदवार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है।
2. मुख्य विपक्ष की गद्दी पर जन सुराज का दावा
राजद के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती भाजपा से अधिक जन सुराज से मिल रही है। प्रशांत किशोर के चुनावी रण में उतरने से बांकीपुर का मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
विपक्ष का नया चेहरा: जन सुराज की सभाओं में उमड़ रही भीड़ ने इस सवाल को जन्म दे दिया है कि 'भाजपा को टक्कर देने वाला असली विकल्प कौन है?'
तेजस्वी की अनुपस्थिति: राजद के 'युवराज' तेजस्वी यादव की प्रचार से दूरी रेखा गुप्ता की चुनावी ताकत को कमजोर कर रही है, जिसका सीधा फायदा विरोधी दल उठा रहे हैं।
3. 'भरत तिवारी एनकाउंटर' और सवर्ण कार्ड
बांकीपुर के चुनावी माहौल को गर्माने में 'भरत तिवारी एनकाउंटर' मामले ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। इस मुद्दे पर जहां राजद का रवैया ढुलमुल रहा, वहीं प्रशांत किशोर ने बाजी मार ली।
पीके खुद बिलौटी गांव जाकर पीड़ित परिवार से मिले और संवेदना प्रकट की।
युवाओं और सवर्ण मतदाताओं को जोड़ने के लिए जन सुराज ने इस मुद्दे को लेकर आक्रामक पोस्टर वार छेड़ दिया है, जिससे युवा वर्ग तेजी से जन सुराज की तरफ आकर्षित हो रहा है।
"राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता अच्छी फाइटर हैं, लेकिन प्रशांत किशोर ने सीधे उनके पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक पर निशाना साधा है। पीके ने मुस्लिम संगठनों से संवाद कर भागीदारी का भरोसा दिया है, जिससे वह मुख्य विपक्ष की भूमिका में उभर रहे हैं।"
— दीपक कोचगवे, वरिष्ठ पत्रकार
4. जमीन पर जन सुराज की माइक्रो-प्लानिंग
जन सुराज इस चुनाव को कितनी गंभीरता से लड़ रहा है, इसका अंदाजा उनकी बूथ स्तर की तैयारी से लगाया जा सकता है। जन सुराज के प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह के अनुसार:
विधानसभा के सभी 24 वार्डों और 422 बूथों पर पैनी नजर है।
चुनावी कमान के लिए 51 वार्ड प्रभारी और 150 सेक्टर प्रभारी जमीन पर उतारे गए हैं।
प्रशांत किशोर खुद लगातार पदयात्राएं कर मतदाताओं से सीधा संपर्क साध रहे हैं।
फैसले की घड़ी: सरकार गिराने का नहीं, जनाक्रोश का चुनाव
जन सुराज का साफ कहना है कि बांकीपुर का यह उपचुनाव किसी को विधायक बनाने या सरकार गिराने का खेल नहीं है। यह सम्राट चौधरी सरकार के पिछले 7 महीनों के कार्यकाल, बढ़ते अपराध, और बिलौटी में भरत तिवारी जैसी प्रशासनिक घटनाओं के खिलाफ जनता के आक्रोश का एक बड़ा 'जनमत संग्रह' है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजद अपनी पारंपरिक जमीन बचाए रखने में कामयाब होती है, या फिर बांकीपुर बिहार की राजनीति में जन सुराज के रूप में एक नए विकल्प का उदय करेगा।