नकली बीज-खाद से फसल बर्बाद हुई तो चुप न बैठें किसान, सीधे जिला कृषि अधिकारी से करें शिकायत; दुकानदार को होगी जेल!

सरकार ने कसी मिलावटखोरों पर नकेल— लाइसेंस होगा रद्द, लगेगा भारी जुर्माना; पीड़ित किसानों को मिलेगा पूरा मुआवजा!

16 Jul 2026  |  815

 

 

नई दिल्ली / प्रादेशिक: खेती-किसानी में फसल की अच्छी पैदावार सही बीज, खाद और कीटनाशकों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। लेकिन मुनाफाखोरी के चक्कर में कुछ दुकानदार किसानों को नकली या घटिया क्वालिटी (सब-स्टैंडर्ड) की सामग्री बेचकर उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर देते हैं। ऐसे मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने बेहद कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब अगर किसी किसान की फसल खराब होती है, तो वे चुप बैठने की बजाय सीधे दोषी दुकानदार के खिलाफ कानूनी एक्शन ले सकते हैं।

फसल खराब होने पर कहाँ और कैसे करें शिकायत?

यदि आपने खेत में खाद-बीज या कीटनाशक का इस्तेमाल किया और फसल बर्बाद हो गई, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। किसान इन आसान स्टेप्स के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

सबूत संभालकर रखें: सबसे पहले उस दुकान का पक्का बिल (कैश मेमो), बचे हुए बीज का पैकेट या खाद की बोरी को सुरक्षित रख लें। यह कानूनी कार्रवाई के लिए सबसे बड़ा सबूत है।

कृषि विभाग में दें लिखित आवेदन: अपने ब्लॉक (विकासखंड) या जिले के कृषि विभाग के अधिकारी (DAO) या सब-डिवीजनल एग्रीकल्चर ऑफिसर के पास जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराएं।

डिजिटल माध्यमों का उपयोग: सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर्स और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर भी घर बैठे शिकायत रजिस्टर कराई जा सकती है।

तुरंत एक्शन लेगी टीम:

शिकायत दर्ज होते ही कृषि विभाग की एक विशेष टीम आपके खेत का मुआयना करने पहुंचेगी। टीम फसल के नुकसान का 'पंचनामा' (स्पॉट असेसमेंट) तैयार करेगी और जांच के लिए मिट्टी व खराब सामग्री के सैंपल लैब भेजेगी।

दोषी पाए जाने पर दुकानदारों को मिलेगी यह कड़ी सजा

यदि लैब जांच में यह साबित हो जाता है कि बीज, खाद या कीटनाशक वास्तव में नकली या घटिया थे, तो कीटनाशक अधिनियम और बीज नियंत्रण आदेश के तहत प्रशासन तुरंत निम्नलिखित सख्त कदम उठाएगा:

लाइसेंस होगा निरस्त: आरोपी दुकानदार या डीलर की दुकान का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से सस्पेंड या हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा।

भारी जुर्माना और जेल की सजा: धोखाधड़ी के मामले में दोषी दुकानदार और संबंधित कंपनी पर भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।

मिलेगा पूरा मुआवजा: सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि कृषि विभाग के माध्यम से पीड़ित किसान को हुए आर्थिक नुकसान और लागत की भरपाई के लिए मुआवजा दिलाने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

किसानों के लिए संदेश:

सजग रहें और अधिकार पहचानें! किसी भी झांसे में आकर बिना बिल के कृषि सामग्री न खरीदें। पक्का बिल ही आपकी फसल की सुरक्षा की गारंटी है और धोखाधड़ी होने पर आपकी सबसे बड़ी ढाल है।

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