SIR विवाद: “नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं, - सुप्रीम कोर्ट, राशन और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने के आरोपों पर सुनवाई को तैयार”

“पश्चिम बंगाल SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर उठे सवाल,राशन और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने के आरोपों पर सुनवाई को तैयार”

17 Jul 2026  |  1389

 

 

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में SIR (Special Intensive Revision / विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी टिप्पणी की है। देश की शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय करना चुनाव आयोग (Election Commission) का संवैधानिक अधिकार नहीं है। आयोग की शक्तियां केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक ही सीमित हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची (Voter List) में नाम न होने मात्र से किसी व्यक्ति की नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणियां और कानूनी स्थिति

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कानून की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया:

आयोग का अधिकार सीमित: अदालत ने कहा कि कानून में कोई भ्रम नहीं है। चुनाव आयोग का काम केवल मतदाता सूची का प्रबंधन देखना है, नागरिकता का निर्धारण करना नहीं।

मंत्रालय को भेजना होगा मामला: यदि कोई ट्रिब्यूनल किसी व्यक्ति का नाम SIR सूची में शामिल न करने का फैसला देता है, तो चुनाव आयोग को नागरिकता के निर्धारण के लिए मामला संबंधित मंत्रालय को भेजना होगा।

राशन और कल्याणकारी योजनाओं पर अधिकार: इससे पहले बुधवार को भी कोर्ट ने साफ किया था कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, वे भी सब्सिडी वाले राशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने के हकदार बने रहेंगे।

अदालत में दलीलें: ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट के सामने व्यावहारिक दिक्कतों को रखा। उन्होंने दलील दी:

"19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों के काम करने के तरीके से व्यावहारिक स्तर पर काफी असंगतियां और देरी पैदा हो रही है। ट्रिब्यूनलों के कामकाज में कई बाधाएं हैं, जिससे मामलों के समय पर निस्तारण पर सीधा असर पड़ रहा है।"

25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई: PDS और अन्नपूर्णा योजना पर नजर

सुप्रीम कोर्ट ने उस मुख्य याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बहाने लोगों को PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली), अन्नपूर्णा योजना और अन्य जरूरी सरकारी लाभों से वंचित किया जा रहा है। शीर्ष अदालत अब इस गंभीर मुद्दे पर 25 अगस्त को अगली सुनवाई करेगी।

हाई कोर्ट जाने का निर्देश

हालांकि, पश्चिम बंगाल के खाद्य और आपूर्ति विभाग द्वारा जून में जारी आदेश के बाद एक याचिकाकर्ता का राशन कार्ड सस्पेंड कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यक्तिगत सस्पेंशन को चुनौती देने वाली याचिका पर सीधे सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को राहत के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है।

क्या है बैकग्राउंड? चुनाव आयोग को पहले मिली थी राहत

यह मामला विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता से जुड़ा हुआ है।

इससे पहले मई में, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने चुनाव आयोग की SIR करने की शक्ति को सही ठहराया था।

कोर्ट ने माना था कि बिहार में वोटर लिस्ट की SIR का आदेश देकर आयोग ने ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट’ (RP Act) का कोई उल्लंघन नहीं किया है और आयोग के पास यह प्रशासनिक अधिकार है।

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