तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने लगातार छठी रात ईरान के कई शहरों और रणनीतिक ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इस बार अमेरिकी मिसाइलों के निशाने पर सिर्फ सैन्य ठिकाने नहीं, बल्कि ईरान का नागरिक और संचार ढांचा (Civilian & Communication Infrastructure) भी रहा।
यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के ठीक बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आया, तो उसके बिजलीघर और पुल भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। इस भीषण तनाव के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप शुक्रवार सुबह अमेरिकी राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं।
ईरान में कहाँ-कहाँ मची तबाही?
ईरानी सरकारी मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात हुए हमलों में दक्षिणी ईरान को भारी नुकसान पहुंचा है:
ईरानशहर: यहाँ के एयरपोर्ट के पास मिसाइलें गिरीं, जिससे हवाई पट्टी और आसपास का क्षेत्र दहल गया।
बंदर अब्बास: इस महत्वपूर्ण तटीय शहर के रेलवे जंक्शन को निशाना बनाया गया, जिसमें रेलवे के दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा एक मुख्य कम्युनिकेशन टावर पर हमला कर संचार व्यवस्था ठप कर दी गई।
बंदर खमीर: होरमोजगान प्रांत के इस इलाके में दो रणनीतिक पुलों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इन हमलों में दो लोगों की मौत हुई है और कई प्रमुख सड़क मार्ग बंद हो गए हैं।
रणनीतिक द्वीप: फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित क़ेश्म द्वीप, चाबहार, बुशेहर और अहवाज में भी भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
कुवैत का वाटर-पावर प्लांट भी चपेट में आया
इस महा-टकराव की तपिश अब पड़ोसी देशों तक भी पहुंचने लगी है। कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ईरान के इस ताजा सैन्य टकराव की चपेट में आकर उनका एक प्रमुख बिजली उत्पादन और समुद्री पानी को मीठा बनाने वाला (Water Desalination) संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गया।
हमले के बाद संयंत्र में भीषण आग लग गई, जिसे दमकल विभाग ने काबू पाया। कुवैत सरकार ने अपने नागरिकों से बिजली और पानी की खपत को बेहद सीमित करने की आपातकालीन अपील की है।
Strait of Hormuz ठप: दुनिया भर में गहरा सकता है तेल संकट
ईरान और अमेरिका की इस जंग का सबसे घातक असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर पड़ा है। जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल गुजरता है, वहाँ जहाजों के पहिए लगभग थम गए हैं:
ऐतिहासिक गिरावट: शिपिंग डेटा (Kpler) के अनुसार, गुरुवार को इस पूरे जलडमरूमध्य से सिर्फ 3 कमोडिटी जहाज ही गुजर पाए, जो मई के बाद से एक दिन में सबसे कम आवाजाही है।
अमेरिकी नाकेबंदी: अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों की घेराबंदी दोबारा शुरू करने के बाद अधिकांश जहाज या तो बंदरगाहों पर रुक गए हैं या रास्ते से ही वापस लौट रहे हैं। प्रतिबंधित टैंकर Miraan और एलपीजी जहाज Norita ईरानी मार्ग से बाहर तो निकले, लेकिन आगे 'ओमान की खाड़ी' में अमेरिकी घेराबंदी के डर से रुक गए हैं।
दोनों पक्षों का दावा: जंग या आत्मरक्षा?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM): "हमारा उद्देश्य ईरान की केवल उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है, जिनका उपयोग वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों को धमकाने और असुरक्षित करने के लिए करता है।"
ईरान सरकार: "अमेरिका खुलेआम नागरिक ठिकानों, पुलों और परिवहन के साधनों पर बमबारी कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। यदि ये हमले नहीं रुके, तो यह महायुद्ध पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले लेगा।"