'आजादी के लिए नहीं, हिंदू मुस्लिम दरार रोकने के लिए बनी थी कांग्रेस'- अरशद मदनी का बड़ा बयान, 'देश प्यार और न्याय से चलता है, बुलडोजर से नहीं'

देवबंद के उलेमाओं ने खड़ा किया था अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा; नफरत के खिलाफ एकजुटता की अपील करते हुए बोले- 'देश प्यार और न्याय से चलता है, बुलडोजर से नहीं'।

18 Jul 2026  |  1054

 

 

देवबंद/नई दिल्ली

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इतिहास और देश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। मदनी ने कहा कि कांग्रेस का गठन मूल रूप से देश की आजादी के लिए नहीं, बल्कि उस दौर में बढ़ रही हिंदू-मुस्लिम दरार को रोकने के मकसद से हुआ था। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब देश में कोई राजनीतिक दल नहीं था, तब देवबंद के उलेमाओं ने ही अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले मजबूत संगठन खड़ा किया था।

दबाव में कांग्रेस ने अपनाया था आजादी का एजेंडा

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अरशद मदनी ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि 1857 की क्रांति और उसके बाद की अन्य लड़ाइयों में शहीदों के बलिदान और संघर्ष कर रहे लोगों के भारी दबाव के बाद ही कांग्रेस ने आगे चलकर आजादी के एजेंडे को अपने मुख्य उद्देश्यों में शामिल किया था।

उन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में उलेमाओं के योगदान को याद करते हुए कहा:

ब्रिटिश गुलामी को सबसे पहले गैर-कानूनी घोषित करने वाले मशहूर विद्वान शेखुल हिंद मौलाना महमूदुल हसन थे, जिन्होंने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था।

हमारे कई धार्मिक विद्वानों ने ब्रिटिश शासन का डटकर मुकाबला किया, जेल की यातनाएं सहीं और फांसी के फंदे को चूमा, लेकिन अंग्रेजों से कभी माफी नहीं मांगी।

जमीयत उलमा-ए-हिंद सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि भारत के आजादी के आंदोलन के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय है।

'देश नफरत से नहीं, प्यार और न्याय से चलता है'

देश के मौजूदा हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए मौलाना मदनी ने कई राज्यों में मदरसों और मस्जिदों के खिलाफ की गई “बुलडोजर कार्रवाई” की कड़ी आलोचना की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश को नफरत और डर के साये में नहीं चलाया जा सकता।

"कोई भी देश लंबे समय तक नफरत के सहारे नहीं चल सकता। देश प्यार, दया और न्याय से चलता है। सरकारें तो आती-जाती रहती हैं, लेकिन असली सत्ता तो अल्लाह, ॐ और ईश्वर के हाथ में ही होती है। आज हमारे उन बुज़ुर्गों की विरासत से जुड़ी निशानियों को मिटाया जा रहा है, जिन्होंने इस देश को आजाद कराने में अपना खून बहाया था।" - मौलाना अरशद मदनी, अध्यक्ष (जमीयत उलमा-ए-हिंद)

सांप्रदायिकता खत्म करने और एकजुटता की अपील

मदनी ने फिरकापरस्ती (सांप्रदायिकता) की आवाज को दबाने और सभी समुदायों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, "हम 1300 साल से इस देश में एक साथ रह रहे हैं। मौजूदा राजनीतिक माहौल ने हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई, सबके आपसी रिश्तों को कमजोर किया है। हम न तो चुनाव लड़ते हैं और न ही लड़ाते हैं, लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि यह नफरत का माहौल भी एक दिन खत्म हो जाएगा।" उन्होंने पूरे मुल्क से सांप्रदायिक मतभेदों को भुलाकर देश की तरक्की के लिए एक साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

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