मोबाइल फोन की घंटी बजने और स्क्रीन पर कोई अनजान नंबर फ्लैश होने पर अक्सर यह सवाल मन में जरूर आता है कि आखिर दूसरी तरफ से फोन करने वाला कौन है। आने वाले दिनों में देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स की यह बड़ी उलझन हमेशा के लिए दूर होने जा रही है। सरकार के कड़े निर्देशों के बाद अब फोन आने पर नंबर के साथ-साथ कॉल करने वाले व्यक्ति का असली नाम भी मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगा। इस नई और क्रांतिकारी व्यवस्था के लिए टेलीकॉम कंपनियों ने अपने नेटवर्क पर सफल ट्रायल पहले ही पूरे कर लिए हैं।
क्या है सीएनएपी (CNAP) तकनीक और यह कैसे काम करेगी?
कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन यानी CNAP एक ऐसी उन्नत टेलीकॉम सर्विस है, जो इनकमिंग कॉल आने पर उस नंबर से जुड़ा हुआ नाम सीधे फोन की स्क्रीन पर दिखाती है। दूरसंचार विभाग (DoT) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, फोन आने पर कॉलर का टेलीफोन नंबर पहले की तरह ही दिखता रहेगा, लेकिन उसके ठीक साथ एक अलग हिस्से में कॉलर का असली नाम भी नजर आएगा।
सबसे खास बात यह है कि आम मोबाइल यूजर्स को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए अपनी तरफ से कुछ भी करने की जरूरत नहीं होगी:
- बिना किसी ऐप के: इसके लिए न तो अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को कोई अर्जी देनी होगी, और न ही फोन में किसी थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन को डाउनलोड करना पड़ेगा।
- सिम डेटा बेस आधारित: स्क्रीन पर दिखने वाला नाम उस सब्सक्राइबर डेटा रिकॉर्ड (SDR) से लिया जाएगा, जो कॉल करने वाले व्यक्ति की टेलीकॉम कंपनी के पास सिम लेते समय दर्ज कराया गया था।
- सेव किए गए नंबर: यदि किसी का नंबर आपके फोन में पहले से सेव है, तो आपके द्वारा दिया गया नाम ही प्रमुखता से दिखेगा। अनजान होने पर ऑपरेटर के डेटाबेस वाला नाम नजर आएगा।
- इंटरनेशनल कॉल्स: देश के बाहर से आने वाली अनसेव्ड कॉल्स पर स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से ‘इंटरनेशनल कॉल’ लिखा हुआ दिखाई देगा।
व्यापारिक संस्थानों और बल्क कनेक्शन के लिए खास नियम
आम ग्राहकों के साथ-साथ दूरसंचार विभाग ने उन कंपनियों या व्यापारिक संस्थानों के लिए भी विशेष प्रावधान किए हैं जो एक साथ कई कनेक्शन यानी बल्क कनेक्शन का इस्तेमाल करते हैं।
- रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क या जीएसटी नाम: योग्य बल्क सब्सक्राइबर्स को व्यक्तिगत नाम की जगह अपना पसंदीदा सत्यापित व्यापारिक नाम स्क्रीन पर दिखाने की अनुमति होगी। इसके लिए वह नाम ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री में रजिस्टर्ड होना चाहिए या जीएसटी (GST) पोर्टल पर दर्ज ट्रेड नेम होना चाहिए।
- सत्यापन अनिवार्य: टेलीकॉम कंपनियों को दस्तावेजों की पूरी जांच और सत्यापन के बाद ही डेटाबेस में कंपनी का नाम अपडेट करना होगा।
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किसे मिलेगी छूट और किन नेटवर्क्स पर लागू होगी सेवा?
यह नई व्यवस्था देश के सभी नेटवर्क्स पर एक साथ लागू नहीं हो रही है:
- चरणबद्ध शुरुआत: 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाला यह पहला चरण केवल उन वायरलेस नेटवर्क को कवर करता है, जो 4G या उससे आगे की तकनीक पर काम करते हैं। 2G, 3G और लैंडलाइन नेटवर्क पर इसे लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
- गोपनीयता का अधिकार: जिन ग्राहकों ने सीएलआईआर (CLIR - Calling Line Identification Restriction) सुविधा ले रखी है, उनके नाम इस सेवा के दायरे से बाहर रहेंगे।
डेटा सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी को लेकर चेतावनी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सेवा केवल अनजान नंबरों की पहचान आसान बनाने के लिए है। स्क्रीन पर नाम दिख जाने मात्र से यह गारंटी नहीं मिलती कि कॉलर पूरी तरह भरोसेमंद है। जालसाज अब भी नए हथकंडे अपना सकते हैं, इसलिए यूजर्स को ओटीपी (OTP) या बैंक विवरण साझा करते समय पूरी सावधानी बरतनी होगी। साथ ही, टेलीकॉम कंपनियों को ‘सिक्योरिटी-by-डिजाइन’ के तहत कॉल समाप्त होते ही नाम की पहचान तुरंत हटाने और एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का सख्त आदेश दिया गया है।
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