नई दिल्ली में 10 से 12 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय ‘ग्लोबल ड्राईलैंड कांग्रेस 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया।
आयोजन की मुख्य बातें:
- विषय (Theme): “साउथ-साउथ सहयोग से शुष्क क्षेत्रों की खेती का कायाकल्प।”
- वैश्विक भागीदारी: संयुक्त राष्ट्र भी दक्षिण-दक्षिण सहयोग दिवस के तहत इस आयोजन में भागीदार बना है।
- ग्लोबल दायरा: दुनिया का लगभग 45% भूभाग शुष्क श्रेणी में आता है, जहां 2 अरब से अधिक आबादी पानी की किल्लत के बीच कृषि पर निर्भर है।
कम पानी में बढ़े पैदावार और किसानों की आय: कृषि मंत्री
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत का लगभग 65 प्रतिशत भूभाग कम पानी वाली खेती (शुष्क/अर्ध-शुष्क क्षेत्रों) के अंतर्गत आता है। उन्होंने रेखांकित किया:
- सूखे इलाकों में कम पानी के बावजूद बेहतर पैदावार लेना और किसानों की आय बढ़ाना केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम विकासशील देशों की साझा चुनौती है।
- भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में शुष्क क्षेत्रों की कृषि उत्पादकता की भूमिका सबसे अहम होगी।
राजस्थान से तेलंगाना तक के किसानों को सीधा लाभ
इस सम्मेलन में हो रहे शोध और चर्चाओं का सीधा फायदा भारत के प्रमुख शुष्क और अनियमित बारिश वाले राज्यों को मिलेगा:
- प्रभावित क्षेत्र: राजस्थान, गुजरात (कच्छ-सौराष्ट्र), महाराष्ट्र (विदर्भ-मराठवाड़ा), कर्नाटक और तेलंगाना के बड़े हिस्से।
- प्रमुख फसलें: बाजरा, ज्वार, चना, अरहर (तुअर) और तिलहन।
- तकनीकी लाभ: हैदराबाद स्थित ICRISAT द्वारा विकसित सूखा-सहनशील बीज किस्मों, आधुनिक जल-संरक्षण तकनीकों और सॉइल-मैनेजमेंट का परीक्षण सबसे पहले इन्हीं क्षेत्रों में किया जाएगा।
'साउथ-साउथ कोऑपरेशन' से अफ्रीका और एशिया को मदद
सम्मेलन के दौरान अफ्रीका और एशिया के कई विकासशील देशों ने भारत के कृषि अनुभवों और तकनीकों में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। दक्षिण भारत जैसी जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों वाले देशों के लिए भारत का कृषि शोध मील का पत्थर साबित हो रहा है। 'साउथ-साउथ सहयोग' के तहत भारत अपनी उन्नत कृषि तकनीकों और सूखा-रोधी बीजों की किस्मों को अन्य विकासशील राष्ट्रों के साथ साझा कर रहा है।





