भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) खिलाड़ी सुचिका तारियाल ने एशियन गेम्स में देश को ब्रॉन्ज मेडल दिलाकर इतिहास तो रचा, लेकिन उनका गोल्ड मेडल जीतने का सपना महज 700 ग्राम वजन की वजह से टूट गया। विनेश फोगाट के पेरिस ओलंपिक वाले विवाद की याद ताजा करते हुए, सुचिका भी खराब प्रदर्शन के कारण नहीं, बल्कि वजन से जुड़े एक अजीबोगरीब नियम के कारण सेमीफाइनल मुकाबला गंवा बैठीं।

सेमीफाइनल में कांटे की टक्कर और ड्रा का विवाद

60 किलोग्राम वर्ग के MMA सेमीफाइनल में सुचिका का मुकाबला सिंगापुर की हुई हून तेओ से था। मैच के रेगुलेशन टाइम और ओवरटाइम के बाद भी जज किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। शुरुआती जजों ने सिंगापुर की खिलाड़ी को विजेता घोषित कर दिया, जिसका भारतीय टीम ने तुरंत कड़ा विरोध किया।

भारतीय टीम ने 1,000 डॉलर की फीस चुकाकर फैसले पर पुनर्विचार (Re-evaluation) की मांग की। नई ज्यूरी ने वीडियो फुटेज देखने के बाद मैच को आधिकारिक तौर पर 'ड्रा' (बराबर) घोषित कर दिया।

इस नियम की वजह से हाथ से फिसला फाइनल का टिकट

मैच ड्रा होने के बावजूद सुचिका फाइनल में जगह नहीं बना सकीं। एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन (AMMA) के नियमों के अनुसार, यदि कोई मुकाबला ड्रा हो जाता है और अन्य टाई-ब्रेकर मानदंड भी बराबर रहते हैं, तो फैसला खिलाड़ियों के सुबह के वजन के आधार पर किया जाता है। नियम के तहत, जिस खिलाड़ी का वजन कम होता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है।

  • सुचिका का वजन: लगभग 59.2 किलोग्राम
  • तेओ का वजन: लगभग 58.5 किलोग्राम

चूंकि सुचिका का वजन सिंगापुर की खिलाड़ी से मात्र 700 ग्राम (0.7 kg) अधिक था, इसलिए तेओ को फाइनल का टिकट दे दिया गया और सुचिका को ब्रॉन्ज मेडल से ही संतोष करना पड़ा।

मैट पर ही फूट-फूटकर रो पड़ीं सुचिका

इस अन्यायपूर्ण फैसले से दुखी होकर सुचिका रिंग (मैट) पर ही फूट-फूटकर रोने लगीं। निराशा और गुस्से में उन्होंने शुरुआत में रेफरी और विरोधी खिलाड़ी से हाथ मिलाने से भी इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने भारत को एमएमए (MMA) में पहला पदक जरूर दिलाया, लेकिन एक अजीब नियम की वजह से वह गोल्ड मेडल का मुकाबला खेलने से वंचित रह गईं।