बठिंडा (पंजाब): पंजाब की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली बठिंडा केंद्रीय जेल इन दिनों अपराधियों के नेटवर्क और सुरक्षा खामियों को लेकर चर्चा में है। जेल की चारदीवारी के भीतर से लगातार बरामद हो रहे नशीले पदार्थ और इस तस्करी में खुद जेल व सुरक्षा कर्मचारियों की गिरफ्तारी ने जेल प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। ताजा घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सलाखों के पीछे 'सफेद जहर' पहुँचाने का कारोबार एक सुनियोजित नेटवर्क के जरिए फल-फूल रहा है।

वर्दी की आड़ में तस्करी: CRPF सिपाही गिरफ्तार

हालिया मामले में, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक सिपाही, राजिंदर सिंह को जेल के भीतर प्रतिबंधित सामान ले जाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। तलाशी के दौरान उसके पास से 23.99 ग्राम अफीम, 158 ग्राम जर्दा और सिरिंज बरामद हुई। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह कैदियों तक यह सामान पहुँचाने के लिए मोटी रकम लेता था।

'पगड़ी' में हेरोइन और गैंगस्टरों से सीधा संपर्क

यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले सप्ताह सीनियर कांस्टेबल अंग्रेज सिंह की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए थे। वह अपनी पगड़ी में 34 ग्राम हेरोइन छिपाकर जेल के अंदर ले जा रहा था।

चौंकाने वाला खुलासा: अंग्रेज सिंह यह नशा A-कैटेगरी के कुख्यात गैंगस्टर सागर उर्फ मछली को सप्लाई करने वाला था।

लेनदेन का खेल: एक खेप पहुँचाने के बदले कर्मचारी को करीब 20 हजार रुपये मिलते थे। ज्ञात हो कि संबंधित गैंगस्टर पर हत्या और लूट जैसे 50 से अधिक मामले दर्ज हैं।

सालों से जारी है कर्मचारियों की संलिप्तता

बठिंडा जेल का रिकॉर्ड बताता है कि यहाँ तस्करी कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2019 से लेकर 2026 तक लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं:

2020: मोबाइल फोन और जर्दा पहुँचाते कर्मचारी धराए गए।

2022-2025: कई जेल गार्ड्स को हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया गया।

क्या फेल हो चुका है हाई-सिक्योरिटी सिस्टम?

विशेषज्ञों और पूर्व जेल अधिकारियों का मानना है कि केवल कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड करना समाधान नहीं है। जेलों में AI आधारित निगरानी प्रणाली, बॉडी स्कैनर्स और डिजिटल एक्टिविटी मॉनिटरिंग की भारी कमी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सुधार गृह ही अपराध का अड्डा बन जाएंगे, तो अपराधियों के पुनर्वास की उम्मीद बेमानी है।

"जेल के भीतर नशा और गैंगस्टरों का नेटवर्क चलना पूरे तंत्र के लिए चेतावनी है। हम गहन जांच कर रहे हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।" — जेल प्रशासन (आधिकारिक वक्तव्य)

अब आगे क्या?

जेल प्रशासन अब 'जीरो टॉलरेंस' नीति का दावा कर रहा है। सुरक्षा जांच को और कड़ा किया जा रहा है और संदिग्ध कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, सवाल अब भी वही है: क्या तकनीक और सख्ती के दम पर इस 'अंदरूनी दीमक' को खत्म किया जा सकेगा?