पटना / नई दिल्ली:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन भले ही शांत पड़ता दिख रहा हो, लेकिन इसका मुख्य केंद्र अब बिहार बनता नजर आ रहा है। बिहार बंद के दौरान पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई कार्रवाई, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और सीवान में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से हवाई फायरिंग के वीडियो ने पूरे विवाद को अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। यह मुद्दा अब केवल शिक्षा तक सीमित न रहकर कानून-व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक वर्चस्व की बड़ी बहस बन चुका है।
सरकार की दो कथित गलतियां बनीं गले की फांस
सीवान में AK-47 से हवाई फायरिंग:
प्रदर्शन के दौरान सीवान में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से हवा में गोलियां चलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया। हालांकि, प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन विपक्ष इसे छात्रों को डराने और सरकारी बर्बरता का प्रत्यक्ष प्रमाण बता रहा है।
छात्रों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और गंभीर धाराएं:
पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया और उन पर कड़ी धाराओं में मामले दर्ज किए गए। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कठोर धाराएं लगाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। दूसरी ओर, बिहार सरकार का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर नियमसंगत कार्रवाई की गई है।
राहुल गांधी बनाम भाजपा: तीखे राजनीतिक बाण
इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में भी उबाल ला दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार में AK-47 के इस्तेमाल और दिल्ली में बल प्रयोग का मुद्दा उठाकर केंद्र व राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
इसके पलटवार में भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताते हुए कहा कि वे देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक बढ़ा विवाद
इस मुद्दे पर चौतरफा घेराबंदी जारी है:
RJD की सुप्रीम कोर्ट में याचिका: आरजेडी सांसद मनोज झा ने पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि केवल आंदोलन होने के आधार पर लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है।
CJP का अल्टीमेटम: छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने चेतावनी दी है कि यदि गिरफ्तार छात्रों को तुरंत रिहा नहीं किया गया और एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो वे फिर से बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे।
विपक्ष जहां इसे छात्रों की आवाज दबाने की साजिश बता रहा है, वहीं बिहार सरकार और सत्तारूढ़ दल का कहना है कि पुलिस अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रही है और इस पूरे मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है।





