कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए प्रचार का शोर आज सोमवार को थम जाएगा। एक तरफ जहाँ राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य के लगभग 12.9 लाख मतदाताओं की नजरें 'SIR ट्रिब्यूनल' पर टिकी हैं। न्यायिक जांच के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए इन लोगों के लिए आज का दिन यह तय करेगा कि वे 29 अप्रैल को अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे या नहीं।

142 सीटें और 'वोटर लिस्ट' का बड़ा पेंच

राज्य की शेष बची 142 विधानसभा सीटों पर बुधवार को मतदान होना है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार, यदि सोमवार तक ट्रिब्यूनल इन नामों को मंजूरी दे देता है, तो इन्हें चुनाव से 48 घंटे पहले 'सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट' में जोड़ दिया जाएगा।

गौरतलब है कि पहले चरण (23 अप्रैल) की वोटिंग से पहले भी 14.2 लाख से अधिक नाम काटे गए थे, लेकिन ट्रिब्यूनल ने उनमें से केवल 139 नामों को ही दोबारा शामिल करने की अनुमति दी थी।

कहां कटे सबसे ज्यादा नाम? (प्रमुख आंकड़े)

न्यायिक जांच प्रक्रिया के दौरान 7 जिलों में कुल 12,87,622 वोटर्स के नाम काटे गए। जिलों के आधार पर स्थिति इस प्रकार है:

जिलाकाटे गए नामों की संख्या
नॉर्थ 24 परगना3,25,666 (सर्वाधिक)
साउथ 24 परगना2,22,929
पूर्वी बर्दवान2,09,805
नदिया2,08,626
हावड़ा1,32,151
हुगली1,20,813
कोलकाता (उत्तर व दक्षिण)67,632

हॉटस्पॉट: मेटियाब्रुज और मतुआ बाहुल्य क्षेत्र

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि साउथ 24 परगना की मेटियाब्रुज सीट पर सबसे ज्यादा 39,579 नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा, राजनीतिक रूप से संवेदनशील मतुआ बाहुल्य क्षेत्रों जैसे रानाघाट उत्तर-पूर्व, रानाघाट दक्षिण और गाइघाटा में भी कुल मिलाकर लगभग 58,000 वोटर्स के नाम काटे गए हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

चुनाव आयोग का पक्ष

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने कहा:

"दूसरे चरण के लिए, जिन वोटर्स के नामों को ट्रिब्यूनल की मंजूरी मिलेगी, केवल उन्हें ही सप्लीमेंट्री लिस्ट के जरिए वोट डालने का मौका दिया जाएगा।"

निष्कर्ष: लोकतंत्र की परीक्षा

जहाँ पहले चरण में भारी मतदान ने उत्साह जगाया है, वहीं इतनी बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम कटने से एक बड़ा सवालिया निशान भी खड़ा हो गया है। क्या सोमवार शाम तक लाखों लोगों को अपना 'लोकतांत्रिक हक' वापस मिल पाएगा या सप्लीमेंट्री लिस्ट एक बार फिर छोटी रह जाएगी? इसका उत्तर आज शाम तक साफ हो जाएगा।