अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस हिरासत में एक 25 वर्षीय युवक की मंगलवार रात मौत हो गई। मृतक की पहचान गांव शहजादपुर निवासी गुरबख्श सिंह के रूप में हुई है। इस घटना के बाद पुलिस के 'बीमारी' वाले दावे और परिवार के 'उत्पीड़न' के आरोपों के बीच गहरा विरोधाभास पैदा हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
गुरबख्श सिंह को पुलिस ने हाल ही में सुसाइड करने वाले वेयरहाउस मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा के घर की बिजली की तारें काटने के आरोप में गिरफ्तार किया था। यह घर पहले से ही एक आत्महत्या के मामले को लेकर चर्चा में था, जिसकी जांच के दौरान पुलिस ने गुरबख्श को हिरासत में लिया था।
पुलिस का पक्ष: "पुरानी बीमारी बनी मौत का कारण"
पुलिस प्रशासन ने अपनी सफाई में कहा है कि गुरबख्श सिंह पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और उसका इलाज चल रहा था।
दलील: पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई।
कार्यवाही: उसे तुरंत गुरु नानक देव अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों का आरोप: "हिरासत में दी गई रूह कंपाने वाली यातनाएं"
दूसरी ओर, मृतक के परिवार ने पुलिस की थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि:
हिरासत के दौरान गुरबख्श के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई।
पिटाई के कारण ही उसकी हालत नाजुक हुई, जिसे पुलिस बीमारी का नाम दे रही है।
अगर समय पर सही डॉक्टरी सहायता और मानवीय व्यवहार मिलता, तो युवक की जान बच सकती थी।
जांच की दिशा: मानवाधिकार आयोग को भेजी रिपोर्ट
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग ने रक्षात्मक रुख अपनाया है:
पोस्टमार्टम: नियमों के तहत शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से करवाया जा रहा है।
पारदर्शिता: घटना की जानकारी मानवाधिकार आयोग को साझा कर दी गई है ताकि जांच की निष्पक्षता पर सवाल न उठें।
निष्कर्ष: फिलहाल पूरी गुत्थी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है। क्या यह वाकई एक प्राकृतिक मौत थी या खाकी की सख्ती ने एक और जान ले ली? इसका खुलासा विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और न्यायिक जांच के बाद ही हो पाएगा। परिवार ने स्पष्ट किया है कि जब तक जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगे।





