कटनी/भोपाल:
मध्य प्रदेश के कृषि और सिंचाई इतिहास में आज का दिन मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज कटनी जिले में बन रहे राज्य के सबसे बड़े इंजीनियरिंग चमत्कार 'स्लीमनाबाद टनल' का हवाई और जमीनी निरीक्षण किया। यह टनल मुख्यमंत्री का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' है, जो अब लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है।
इस ऐतिहासिक टनल के चालू होने से विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के 6 जिलों के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे न केवल किसानों के खेतों को पानी मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की पूरी आर्थिक तस्वीर ही बदल जाएगी।
एक नजर में स्लीमनाबाद टनल परियोजना
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| टनल की कुल लंबाई | 11.952 किलोमीटर (मुख्य टनल) |
| व्यास (Diameter) | 10.14 मीटर |
| कुल सिंचित क्षेत्र | 2.45 लाख हेक्टेयर (2,45,000 हेक्टेयर) |
| लाभान्वित होने वाले जिले | जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना |
| कुल परियोजना लागत | ₹1610.47 करोड़ (96.66% कार्य पूर्ण) |
| तकनीकी विशेषता | बिना बिजली या पंप के, केवल ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण) के सहारे पानी बहेगा |
विज्ञान का अनोखा चमत्कार: गंगा बेसिन में पहुंचेंगी मां नर्मदा
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे विज्ञान और आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बड़ा चमत्कार बताया। उन्होंने कहा:
"नर्मदा नदी पश्चिम की ओर बहकर खंभात की खाड़ी में मिलती है, लेकिन इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से मां नर्मदा अब गंगा बेसिन में पहुंचकर सोन नदी के आसपास के सूखे अंचलों में भी हरियाली लाएगी। विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन पानी की कमी हमेशा एक चुनौती रही है। यह टनल इस क्षेत्र के लिए अमृतधारा बनेगी।"
सीएम ने यह भी बताया कि यह टनल इतनी मजबूत बनाई गई है कि भीषण से भीषण भूकंप आने पर भी यह अगले 100 वर्षों तक पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। कई स्थानों पर यह टनल जमीन से 120 फीट नीचे से गुजर रही है।
जानलेवा चुनौतियों को मात देकर तैयार हुई टनल
विंध्य पर्वतमाला की कठोर चट्टानों को भेदकर इस टनल को बनाना तकनीकी रूप से लगभग असंभव माना जा रहा था। इस दौरान निर्माण टीम ने कई अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया:
कठोर चट्टानें और दलदल: खुदाई के दौरान मार्बल-लाइमस्टोन, कठोर डोलोमाइट चट्टानों और पानी में घुली चूने की विशालकाय भूमिगत गुफाओं ने काम बेहद मुश्किल कर दिया था।
बाढ़ जैसे हालात: टनल के भीतर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक पानी का रिसाव हो रहा था और मिट्टी लगातार धंस रही थी।
जर्मन तकनीक का इस्तेमाल: अमेरिकी टनल बोरिंग मशीन (TBM) के टूटने के बाद, जर्मनी से अत्याधुनिक 'हेरेनकनेक्ट' मशीन मंगवाई गई और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक का उपयोग किया गया।
सुरक्षित निर्माण: घनी आबादी, नेशनल हाईवे और व्यस्त रेलवे ट्रैक के ठीक 30 मीटर नीचे से गुजरने के बावजूद इस टनल का निर्माण बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
किसानों से सीएम की भावुक अपील: "अपनी जमीन मत बेचना"
मुख्यमंत्री ने 'किसान कल्याण वर्ष' के अवसर पर इस टनल को किसानों के लिए एक बड़ी सौगात बताया। उन्होंने कहा कि आगामी तीन महीनों में ही रबी की फसल के लिए किसानों को 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी मिलना शुरू हो जाएगा।
सीएम ने मंच से किसानों से एक विशेष अपील करते हुए कहा:
"मेरा सभी किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन न बेचें। आने वाले समय में पानी की उपलब्धता के बाद यह पूरा क्षेत्र खेती के मामले में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ देगा। यहाँ से पलायन पूरी तरह रुकेगा और समृद्धि आपके द्वार आएगी।"
विकास का भविष्य: दिसंबर 2027 तक का रोडमैप
राज्य सरकार ने इस टनल परियोजना के माध्यम से प्रदेश में सिंचाई के रकबे को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचाने का संकल्प लिया है। एक समय मध्य प्रदेश में कुल सिंचाई रकबा केवल 7.5 लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
सरकार का आगामी रोडमैप:
दिसंबर 2026 तक: 87,433 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था कर दी जाएगी।
दिसंबर 2027 तक: कुल 1,54,693 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अलावा जल संसाधन विभाग की अन्य परियोजनाओं के लिए भी इसी टनल से 30,307 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए पानी रिजर्व रखा गया है।





