बेंगलुरु | आईटी सिटी कहे जाने वाले बेंगलुरु के सोलादेवनहल्ली इलाके से एक ऐसी खबर आई है, जिसने समाज के आधुनिक होने के दावों की पोल खोल दी है। एक 35 वर्षीय पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर, सुषमा ने दहेज लोभियों की निरंतर प्रताड़ना से तंग आकर कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पीछे छूट गया है एक 4 साल का मासूम, जिसकी दुनिया अब पूरी तरह उजड़ चुकी है।

शादी में दिए 10 लाख और सोना, फिर भी जारी रही मांग

मृतका पी. सुषमा के परिजनों का आरोप है कि शादी के वक्त उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार 10 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में सोने के जेवर दिए थे। सुषमा खुद एक स्वावलंबी महिला थीं और उन्होंने अपनी कमाई से कार भी खरीदी थी। परिवार को लगा था कि बेटी एक खुशहाल जिंदगी जिएगी, लेकिन हकीकत इसके उलट निकली।

"ससुराल वालों की लालच की सीमा कभी खत्म नहीं हुई। पति और सास लगातार और अधिक पैसों की मांग करते थे और बात-बात पर सुषमा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।" — परिजनों का बयान

एक होनहार करियर का दुखद अंत

सुषमा एक पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं, जिन्होंने कुछ समय पहले अपनी नौकरी छोड़ दी थी। शिक्षित और आत्मनिर्भर होने के बावजूद, वह समाज की इस कुरीति और घरेलू कलह के दलदल में ऐसी फंसीं कि उन्हें मौत का रास्ता आसान लगा। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

प्रमुख बिंदु: घटना का विवरण

मृतका: पी. सुषमा (35 वर्ष), पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर।

स्थान: सोलादेवनहल्ली, बेंगलुरु।

आरोप: पति और सास पर अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप।

प्रभाव: 4 साल का मासूम बच्चा अब अनाथ हो गया है।

बड़ा सवाल: कब खत्म होगी दहेज की ये भूख?

यह घटना चीख-चीख कर सवाल पूछ रही है कि आखिर शिक्षा और ऊंचे पदों पर बैठने के बावजूद हमारी सोच में बदलाव कब आएगा? एक मासूम बच्चे के सिर से मां का साया छिन जाने का जिम्मेदार आखिर कौन है? बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहर में एक शिक्षित महिला का इस तरह दम तोड़ देना यह बताता है कि दहेज का दानव अब भी हमारे समाज की जड़ों में बैठा हुआ है।

अब सबकी नजरें कानून पर टिकी हैं—क्या उस मासूम को और सुषमा की रूह को न्याय मिल पाएगा?