शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने आवासीय परियोजनाओं में पारदर्शिता लाने और निर्माण कार्यों को विनियमित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 9 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद प्रदेश में 'हिमाचल प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट' को दोबारा लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से न केवल मनमाने निर्माण पर रोक लगेगी, बल्कि सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
नगर एवं ग्राम नियोजन (TCP) मंत्री राजेश धर्माणी ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि अब बिल्डरों को कड़े नियमों के दायरे में लाया जाएगा।
चेस्टर हिल विवाद से लिया सबक
सरकार का यह फैसला सोलन के 'चेस्टर हिल प्रोजेक्ट' में नियमों की घोर अनदेखी और अव्यवस्थाओं के सामने आने के बाद लिया गया है। इस प्रोजेक्ट में सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी और नियमों को ताक पर रखकर किए गए निर्माण के बाद सरकार ने बिल्डरों पर नकेल कसने की तैयारी की है।
अब देना होगा 'एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज' (EDC)
एक्ट के दोबारा लागू होने से सरकार बिल्डरों से बाह्य विकास शुल्क (EDC) वसूल सकेगी।
उद्देश्य: इस शुल्क का उपयोग संबंधित आवासीय क्षेत्र में सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और पानी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा।
दरें: नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से नगर निगम, नियोजित क्षेत्रों और विशेष क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें तय करेगा।
EC (भारमुक्त प्रमाण पत्र) के लिए शर्तें हुई सख्त
अब किसी भी डेवलपर को तब तक एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) जारी नहीं किया जाएगा, जब तक वह परियोजना स्थल पर पर्याप्त जल आपूर्ति और सड़क संपर्क सुनिश्चित नहीं कर देता।
विशेष जांच समिति: सरकार ने पुराने और निर्माणाधीन प्रोजेक्टों की कमियों की पहचान करने के लिए एक विशेष कमेटी के गठन का भी निर्देश दिया है।
TCP के पास पंजीकरण अनिवार्य
नए नियमों के तहत अब हिमाचल में किसी भी आवासीय प्रोजेक्ट के लिए बिल्डरों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। यदि पंजीकरण के बाद निर्माण के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के निदेशक के पास बिल्डर पर कड़ी कार्रवाई करने की सीधी शक्ति होगी।
एक्ट की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट, 2005 को सितंबर 2005 में लागू किया गया था। लेकिन 2016 में केंद्र सरकार द्वारा रेरा (RERA) लागू किए जाने के बाद, कानूनों की जटिलता को कम करने के लिए इसे निरस्त कर दिया गया था। अब, स्थानीय जरूरतों और निर्माण की गुणवत्ता को देखते हुए इसे 2026 में पुनः प्रभावी बनाया जा रहा है।





