कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित सुवेंदु सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में राज्य की जनता, विशेषकर महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए कई ऐतिहासिक और बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है। सरकार ने अपनी चुनावी प्राथमिकताओं को अमलीजामा पहनाते हुए महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता और मुफ्त परिवहन सेवा को मंजूरी दे दी है।
महिलाओं के लिए 'अन्नपूर्णा भंडार' और मुफ्त सफर
कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की ओर से अहम घोषणाएं की गईं, जो आगामी 1 जून से पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएंगी:
₹3,000 की मासिक सहायता: राज्य की महिलाओं के लिए 'अन्नपूर्णा भंडार योजना' को हरी झंडी दे दी गई है। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।
मुफ्त बस सेवा: 1 जून से ही राज्य की सभी महिलाएं सरकारी बसों में मुफ्त में सफर कर सकेंगी।
नहीं भरना होगा नया फॉर्म: कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया कि जिन महिलाओं का नाम पहले से 'लक्ष्मी भंडार' योजना में दर्ज है, उन्हें 'अन्नपूर्णा भंडार' के लिए नए सिरे से फॉर्म भरने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। उनका ट्रांसफर सीधे इस नई योजना में कर दिया जाएगा।
मदरसों और धार्मिक भत्तों पर कड़ा फैसला
सुवेंदु कैबिनेट ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए साफ किया है कि अब राज्य में मदरसों को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी।
"कैबिनेट ने मदरसों को मिलने वाली तमाम सरकारी सहायता को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया है। इसके दायरे में इमाम और मोअज्जिम को मिलने वाला मासिक भत्ता भी आएगा।"
सरकारी कर्मचारियों को सौगात, पर DA पर सस्पेंस बरकरार
राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए भी कैबिनेट से एक बड़ी राहत की खबर आई है। सरकार ने 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है। हालांकि, कर्मचारियों को उम्मीद थी कि इस बैठक में बकाया महंगाई भत्ते (DA) पर कोई फैसला आएगा, लेकिन फिलहाल बकाया डीए पर निर्णय को टाल दिया गया है।
OBC आरक्षण की दोबारा जांच और प्रशासनिक बदलाव
आरक्षण की समीक्षा: कैबिनेट ने फैसला किया है कि साल 2011 से अब तक राज्य में जारी की गई ओबीसी (OBC) आरक्षण सूची की दोबारा से गहन जांच (Scrutiny) कराई जाएगी।
हर 15 दिन में कैबिनेट: प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री ने तय किया है कि अब राज्य मंत्रिमंडल की बैठक महीने में दो बार, यानी हर 15 दिन में एक बार अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में कोटा पात्रता तय करने के लिए एक नई विशेष समिति का गठन किया जाएगा, जो पारदर्शी तरीके से काम करेगी।
'कल्याणकारी कार्यक्रम धार्मिक पहचान पर आधारित नहीं होने चाहिए'
सुवेंदु सरकार के इस फैसले को राज्य की नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि किसी भी लोक-कल्याणकारी योजना का आधार धार्मिक पहचान नहीं होना चाहिए।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, सूचना एवं सांस्कृतिक मामले विभाग तथा अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा धार्मिक आधार पर संचालित की जा रही सभी योजनाएं इस चालू माह (मई) के अंत तक ही लागू रहेंगी। जून की शुरुआत से इन सभी योजनाओं पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी।
पिछली सरकार के फैसलों पर चली कैंची
गौरतलब है कि राज्य की पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने सत्ता में आने के एक साल बाद राज्य के इमामों, मुअज्जिनों और सनातन धर्म के मंदिर के पुजारियों के लिए मासिक मानदेय (भत्ते) की घोषणा की थी। नई सरकार ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा मानते हुए अब बंद करने का निर्णय लिया है।
कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश का पालन
कैबिनेट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले को भी अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें राज्य की तत्कालीन ओबीसी सूची को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने का निर्देश दिया गया था। सुवेंदु सरकार ने इस सूची को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए यह साफ कर दिया है कि अब नए सिरे से और संवैधानिक मापदंडों के आधार पर ही पिछड़ेपन का आकलन किया जाएगा।
"हम राज्य में कानून का शासन और समानता स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नई समिति के गठन के बाद ही न्यायसंगत तरीके से आरक्षण और पात्रता तय की जाएगी।" — अग्निमित्रा पॉल, कैबिनेट मंत्री
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपनी पहली ही बैठक में इस तरह के कड़े कदम उठाकर सुवेंदु अधिकारी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि उनकी सरकार प्रशासनिक और नीतिगत सुधारों के मामले में बेहद आक्रामक रुख अपनाने वाली है।





