बशीरहाट/मालदा: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Revision) को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर 24 परगना के बशीरहाट और मालदा के सुजापुर में सैकड़ों मतदाताओं के नाम 'सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट' से गायब होने के बाद स्थानीय निवासियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया है।

बशीरहाट उत्तर: 340 मतदाताओं का नाम सूची से बाहर

बशीरहाट उत्तर विधानसभा क्षेत्र के गोबरा गांव में बुधवार सुबह उस वक्त तनाव फैल गया, जब सोमवार रात जारी हुई पहली पूरक मतदाता सूची में 340 लोगों के नाम नदारद मिले।

विरोध प्रदर्शन: आक्रोशित ग्रामीणों ने सुबह 10:30 बजे गोबरा-बशीरहाट रोड को जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस चक्काजाम के कारण यातायात पूरी तरह ठप रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद ही जाम खोला गया।

अजीबोगरीब मामला: सूची से गायब नामों में मोहम्मद सफीकुल आलम का नाम भी शामिल है, जो स्वयं एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में सेवा दे चुके हैं।

प्रक्रिया पर सवाल: ग्रामीणों का कहना है कि 992 मतदाताओं में से 358 को नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया गया था। दस्तावेजों की जांच के बाद 28 फरवरी की सूची में उन्हें 'विचाराधीन' (Under Adjudication) रखा गया, लेकिन पूरक सूची में केवल 18 नाम शामिल किए गए और बाकी 340 को बाहर कर दिया गया।

मालदा (सुजापुर): पीढ़ियों से रह रहे लोगों के नाम भी कटे

ऐसी ही स्थिति मालदा जिले के सुजापुर विधानसभा क्षेत्र के सिलमपुर 1 पंचायत में देखी गई। यहाँ एक बूथ के 522 मतदाताओं को 'विचाराधीन' श्रेणी में डाला गया था।

दस्तावेज बेअसर: सुनवाई में शामिल होने और पुख्ता दस्तावेज जमा करने के बावजूद 427 मतदाताओं के नाम पहली पूरक सूची से बाहर कर दिए गए हैं।

वर्षों पुराने वोटर: 50 वर्षीय मेर अली महलदार ने हैरानी जताते हुए कहा कि वह 2002 से पहले से नियमित रूप से मतदान कर रहे हैं और उनका परिवार पीढ़ियों से यहाँ रह रहा है, फिर भी उनका नाम काट दिया गया।

प्रशासनिक चुप्पी और राजनीतिक प्रतिक्रिया

अधिकारियों का रुख: ग्रामीणों ने जब बशीरहाट-2 के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) से संपर्क किया, तो उन्होंने क्षेत्राधिकार की सीमाओं का हवाला देते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

TMC का रुख: स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता राजेश महलदार ने इसे "लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन" बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रभावित मतदाताओं का विवरण जुटा रही है और चुनाव आयोग किसी भी वास्तविक मतदाता को उसके अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।

"हमने कई दस्तावेज जमा किए, फिर भी हमारे नाम गायब हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि हमारे दस्तावेजों की समीक्षा की गई या उन्हें बिना देखे ही खारिज कर दिया गया।" — काजिरुल इस्लाम, प्रभावित मतदाता

निष्कर्ष: मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना चुनाव की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रभावित ग्रामीणों ने अब इस मामले को लेकर ट्रिब्यूनल (Tribunal) का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।