कोलकाता/नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी 'चूक' पकड़ी है। आयोग ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े करीब 1,000 लोगों की व्यक्तिगत सुरक्षा में 2,185 पुलिसकर्मियों की तैनाती पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि अगले दो-तीन दिनों के भीतर इस सुरक्षा व्यवस्था की 'निष्पक्ष और पेशेवर' समीक्षा की जाए।

आंकड़ों में 'विशेषाधिकार' का खुलासा

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, 15 मार्च को चुनावों की घोषणा से ठीक पहले तक सुरक्षा का वितरण कुछ इस प्रकार था:

TMC के सीधे जुड़े नेता: 832 व्यक्तियों को पुलिस सुरक्षा दी गई थी।

पार्टी समर्थक व अन्य: 144 अन्य लोगों को भी सुरक्षा घेरे में रखा गया था।

पुलिस बल का उपयोग: कुल 2,185 जवान केवल इन चुनिंदा लोगों की सेवा में तैनात थे।

आयोग ने इस स्थिति को "गंभीर चूक" मानते हुए स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा का आवंटन केवल खतरे के वास्तविक आकलन (Threat Perception) के आधार पर होना चाहिए, न कि राजनैतिक संबंधों के आधार पर।

प्रशासनिक 'सर्जरी': 1,370 अधिकारियों का तबादला

चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने राज्य सरकार द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर तबादलों को भी दुरुस्त किया है। अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच राज्य सरकार ने 1,370 अधिकारियों का ट्रांसफर किया था, जिसे आयोग ने 'गड़बड़ी' करार दिया।

ECI का एक्शन: मुख्य सचिव, DGP, होम सेक्रेटरी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर जैसे शीर्ष पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

निलंबन: TMC के लिए खुलेआम प्रचार करने वाले एक राज्य सरकार के अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

'छप्पा' और 'बूथ जाम' मुक्त चुनाव का संकल्प

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों ने बंगाल के प्रशासनिक और पुलिस अमले को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चुनाव '7 मुक्त' होने चाहिए:

डर मुक्त 2. हिंसा मुक्त 3. धमकी मुक्त 4. लालच मुक्त 5. छप्पा मुक्त 6. बूथ जाम मुक्त 7. सोर्स जाम मुक्त।

ऐतिहासिक सुरक्षा: 2.4 लाख केंद्रीय बल तैनात

पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान के लिए आयोग ने अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती का फैसला किया है:

CAPF की तैनाती: लगभग 2.4 लाख केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए जाएंगे।

वोटिंग के बाद की योजना: 29 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद भी 200 कंपनियां EVM और काउंटिंग सेंटर की सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगी।

कानून-व्यवस्था: हिंसा रोकने के लिए 500 कंपनियां अगले आदेश तक राज्य में ही टिकी रहेंगी।

मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना के बाद, आयोग ने उस मामले की जांच NIA को सौंप दी है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है। बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे।