कोलकाता | विशेष संवाददाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की रणभेरी बजने के साथ ही निर्वाचन आयोग (EC) ने राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व रणनीतिक घेराबंदी शुरू कर दी है। सोमवार, 2 मार्च को कोलकाता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार चुनाव केवल सुरक्षा बलों के भरोसे नहीं, बल्कि हाई-टेक निगरानी के साये में होंगे।
'इन-आउट' सीसीटीवी सर्विलांस: गड़बड़ी की अब खैर नहीं
उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती ने जिला मजिस्ट्रेटों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद एक बड़ा आदेश जारी किया है। अब तक केवल बूथ के अंदर वेबकास्टिंग की व्यवस्था होती थी, लेकिन इस बार:
दोहरी निगरानी: पोलिंग बूथ के अंदर और बाहर दोनों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
त्वरित कार्रवाई: यदि कोई असामाजिक तत्व बूथ में जबरन घुसने की कोशिश करता है या बाहर मतदाताओं को डराने का प्रयास करता है, तो वह सीधे कैमरे की जद में होगा और आयोग तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा।
पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी: बूथ के बाहरी परिसर की निगरानी का जिम्मा विशेष रूप से ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षकों) को सौंपा गया है।
न्यायिक अधिकारियों की भारी तैनाती
चुनाव में कानूनी पेचीदगियों और शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए आयोग ने 'ज्यूडिशियल' कवच तैयार किया है।
6 मार्च का डेडलाइन: आगामी 6 मार्च को कुल 200 न्यायिक अधिकारी बंगाल पहुंचेंगे।
इनमें से 100 अधिकारी झाड़ग्राम से और 100 ओडिशा से बुलाए गए हैं।
विशेष फोकस: जिन क्षेत्रों में चुनावी हिंसा या कानूनी मामले अधिक विचाराधीन हैं, वहां इन अधिकारियों की तैनाती ज्यादा सघन होगी।
केंद्रीय बलों के लिए 'नो हॉस्पिटैलिटी' प्रोटोकॉल
आयोग ने सुरक्षा बलों की निष्पक्षता को लेकर एक बेहद सख्त निर्देश जारी किया है। बैठक में स्पष्ट कहा गया कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) को किसी भी स्थानीय व्यक्ति या राजनीतिक दल से किसी भी प्रकार का 'आतिथ्य सत्कार' (खाना या अन्य सुविधाएं) स्वीकार नहीं करना चाहिए। यह कदम सुरक्षा बलों की तटस्थता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
जमीनी हकीकत पर आयोग की नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, बैठक में बूथों की वर्तमान स्थिति पर आयोग ने असंतोष व्यक्त किया है।
चिंता के विषय:
कई मतदान केंद्रों पर अभी तक पीने के पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
आयोग ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए हर बूथ की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश करने का आदेश दिया है।
निष्कर्ष: चुनाव आयोग के इन कड़े तेवरों से साफ है कि बंगाल की चुनावी जंग में इस बार 'जमीनी हकीकत' और 'तकनीकी निगरानी' के बीच संतुलन बिठाकर धांधली की हर गुंजाइश को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।





