कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही चुनाव आयोग (EC) ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को कोलकाता में वरिष्ठ नौकरशाहों, जिलाधिकारियों (DMs) और पुलिस अधीक्षकों (SPs) के साथ बैठक में स्पष्ट चेतावनी दी कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि यदि कहीं भी गड़बड़ी हुई, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन्हें "कठोर दंड" दिया जाएगा।

"हिंसा हुई तो जवाबदेही तय होगी"

पूर्ण पीठ के साथ बंगाल के दौरे पर आए मुख्य चुनाव आयुक्त ने जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs) को संबोधित करते हुए कहा:

"चुनाव आयोग मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि हिंसा होती है, तो उन अधिकारियों की पहचान की जाएगी जो ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैनात थे, और उन्हें बिना किसी संदेह के दंडित किया जाएगा।"

रडार पर 'दागी' जिले और मतदाता सूची में गड़बड़ी

बैठक के दौरान आयोग ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया में पाई गई अनियमितताओं पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया। सूत्रों के अनुसार, कुछ जिलों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए कोरे कागज, अखबार की कतरनें और धुंधली तस्वीरें तक अपलोड की गई थीं, जिन्हें अधिकारियों ने मंजूरी भी दे दी थी।

अधिकारियों को चेतावनी: आयोग ने माना कि यदि जिलाधिकारी सतर्क होते, तो ऐसी लापरवाही नहीं होती।

सख्त संदेश: चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि वह अधिकारियों की किसी भी गलती—चाहे वह जानबूझकर की गई हो या अनजाने में—को स्वीकार नहीं करेगा।

विपक्षी दलों की चिंता और 'एक्शन प्लान'

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर बंगाल में 'चुनावी आतंक' का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल विरोधियों को प्रचार करने और समर्थकों को बूथ तक पहुंचने से रोकने के लिए भय का माहौल बनाता है। इसके जवाब में आयोग ने तत्काल निर्देश जारी किए:

छापेमारी शुरू: सोमवार शाम से ही अवैध हथियारों की जब्ती, काले धन और अवैध शराब के प्रवाह को रोकने के लिए छापेमारी के आदेश दिए गए हैं।

केंद्रीय बलों का उपयोग: जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे केंद्रीय सुरक्षा बलों का उचित और प्रभावी उपयोग करें ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

अभियान पर निगरानी: अधिकारियों को हर समय यह ध्यान रखने को कहा गया है कि आयोग किसी भी समय दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकता है।

निष्कर्ष

चुनाव आयोग का यह 'जीरो टॉलरेंस' वाला रुख संकेत देता है कि 2026 का बंगाल चुनाव सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से अभूतपूर्व होने वाला है। आयोग की प्राथमिकता बंगाल की उस छवि को बदलना है जिसमें 'चुनाव' और 'हिंसा' अक्सर एक-दूसरे के पूरक माने जाते रहे हैं।