कोलकाता | समाचार सेवा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच राजनीति गरमा गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में चुनाव आयोग की फुल बेंच अभी बंगाल के दौरे पर है। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से मुलाकात कर चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है।
प्रमुख मांग: कम चरणों में हो मतदान
भाजपा ने चुनाव आयोग से अपील की है कि चुनावी प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए।
सीमित चरण: पार्टी ने मांग की है कि मतदान एक, दो या अधिकतम तीन चरणों में ही संपन्न होना चाहिए।
तर्क: भाजपा नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा, "7 या 8 चरणों में चुनाव कराने की कोई जरूरत नहीं है। प्रक्रिया को कम समय में खत्म किया जाना चाहिए।"
सुरक्षा बलों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) की करीब 400 कंपनियों के मौजूदा इस्तेमाल पर असंतोष जताया है:
पुलिस की भूमिका पर कटाक्ष: भाजपा ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस केंद्रीय बलों को 'गाइड' कर रही है, जिससे उनका प्रभाव कम हो रहा है।
रूट मार्च का 'दिखावा': पार्टी नेता शिशिर बाजोरिया ने दावा किया कि रूट मार्च जानबूझकर संवेदनशील इलाकों के बजाय उन मुख्य सड़कों पर किए जा रहे हैं जहाँ आबादी कम है। उन्होंने इसे "महज एक खानापूर्ति" करार दिया।
'डर-मुक्त' माहौल के लिए कड़े एक्शन की मांग
भाजपा ने आयोग से मांग की है कि उन सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जो मतदाताओं को डराने या प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। पार्टी का कहना है कि वर्तमान "कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग" उपाय (विश्वास बहाली के प्रयास) जमीन पर विफल साबित हो रहे हैं।
आयोग की सक्रियता
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी के साथ आज कोलकाता में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधियों से मिल रहे हैं। आयोग का उद्देश्य चुनाव से पहले सभी पक्षों की चिंताओं को सुनकर एक पारदर्शी और हिंसा-मुक्त खाका तैयार करना है।
भाजपा की 16 सूत्रीय मांगों के मुख्य बिंदु:
चुनाव अधिकतम 3 चरणों में हों।
केंद्रीय बलों का नियंत्रण राज्य पुलिस के बजाय सीधे आयोग के पास हो।
संवेदनशील बूथों पर रूट मार्च की सघनता बढ़ाई जाए।
पक्षपाती अधिकारियों पर तत्काल गाज गिरे।





