नई दिल्ली:
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (PMUY) के लाभार्थियों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर है। सरकार ने इस योजना के तहत सालाना मिलने वाले सब्सिडी वाले कुकिंग गैस सिलेंडरों के कोटे में भारी कटौती कर दी है। अब लाभार्थियों को एक साल में 9 के बजाय सिर्फ 4 सिलेंडर ही सब्सिडी वाले मिलेंगे। सोमवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की आधिकारिक जानकारी दी।
कोटा घटने का क्या है सरकारी तर्क?
मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की असल औसत घरेलू खपत को देखते हुए उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पीएमयूवाई परिवारों की औसत सालाना खपत मोटे तौर पर 4 सिलेंडरों के आसपास ही है, इसलिए मदद को सही स्तर पर लाने के लिए यह सीमा तय की गई है।
गौरतलब है कि मई 2016 में जब यह योजना शुरू हुई थी, तब सालाना 12 सिलेंडर मिलते थे, जिसे पिछले साल घटाकर 9 किया गया और अब इसे और कम करके 4 कर दिया गया है।
LPG की कीमतों में लगी आग: जानिए नया गणित
सब्सिडी वाले कोटे में यह कटौती ऐसे समय पर हुई है जब घरेलू गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। दिल्ली और अन्य राज्यों में पिछले तीन महीनों में दो बार की बढ़ोतरी के बाद रसोई गैस के दाम कुल मिलाकर 89 रुपए बढ़ चुके हैं:
ताजा बढ़ोतरी: 7 जून को कुकिंग गैस (LPG) की कीमतों में 29 रुपए प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया।
नई खुदरा (Retail) कीमत: इस बढ़ोतरी के बाद अब दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की खुदरा कीमत 942 रुपए हो गई है।
उज्ज्वला लाभार्थियों की जेब पर असर: सरकार इस योजना के तहत 300 रुपए की लक्षित (Targeted) सब्सिडी देती है। सब्सिडी घटने/हटने के बाद, अब लाभार्थियों को 14.2-kg वाले एक सिलेंडर के लिए 642 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ी लागत
अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने बताया कि फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में आग लगी हुई है:
46% बढ़ा बेंचमार्क: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आई रुकावटों के कारण खाड़ी देशों से सप्लाई बेहद कम हो गई है, जिससे वैश्विक बेंचमार्क (सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) फरवरी के बाद से लगभग 46% तक बढ़ गया है।
लागत बनाम बिक्री: इस संकट के चलते भारत में घरेलू LPG सिलेंडर की सप्लाई लागत बढ़कर 1,600 रुपए से अधिक हो चुकी है। सरकार की अनुमानित सप्लाई कॉस्ट (₹1600) की तुलना में लाभार्थियों को असल में प्रति सिलेंडर लगभग 1,000 रुपए की सरकारी मदद मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय तुलना: सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी उछाल के बावजूद, भारतीय घरों में खाना पकाने वाली गैस के लिए दुनिया में सबसे कम कीमतें चुकाई जा रही हैं।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान; पेट्रोल, डीजल और CNG भी महंगी
सरकार ने जानकारी दी कि वर्ष 2022 से अब तक सरकार 52,000 करोड़ रुपए की भारी-भरकम सब्सिडी दे चुकी है। इसके बावजूद वैश्विक मंदी और युद्ध के कारण ऑयल कंपनियों को हर 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर लगभग 700 रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कंपनियों की इस 'Under-Recovery' (लागत और बिक्री मूल्य का अंतर) का असर अन्य ईंधनों पर भी दिख रहा है:
पेट्रोल और डीजल: पेट्रोल पर लागत से 6 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 30 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसकी भरपाई के लिए पिछले महीने चार किस्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जा चुकी है।
CNG के दाम भी बढ़े: गैस की बढ़ती कीमतों के इस दौर में सीएनजी (CNG) की कीमतों में भी 6 रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया है।
कुल मिलाकर, ऑयल कंपनियों को रोजाना 600-700 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है, जिसकी वजह से घरेलू बाजार में ईंधनों की कीमतें बढ़ाना और सब्सिडी के कोटे को सीमित करना सरकार की मजबूरी बन गया है।





