नई दिल्ली।

बिहार के साहिबगंज से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने सात साल पुराने एक हर्ष फायरिंग मामले में विधायक को गैर-इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए शनिवार को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर भारी जुर्माना लगाते हुए पीड़ित परिवार को ₹25 लाख का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

क्या था 7 साल पुराना यह मामला?

यह पूरी घटना 31 दिसंबर 2018 की रात यानी नए साल के जश्न के दौरान की है।

हादसे में मौत: दिल्ली में आयोजित एक न्यू ईयर पार्टी के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में एक महिला डॉक्टर, डॉ. अर्चना गुप्ता को गोली लग गई थी। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इन धाराओं में दोषी: अदालत ने इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 (भाग-दो) यानी गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया था।

'वो मेरी भाभी जैसी थीं'— विधायक की नरमी की अपील खारिज

सजा के ऐलान से पहले शुक्रवार को हुई कोर्ट की कार्यवाही में विधायक राजू कुमार सिंह ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की भावुक अपील की थी। उन्होंने कोर्ट के सामने अपनी सफाई में कहा था:

"मेरा किसी की जान लेने का कोई इरादा नहीं था। डॉ. अर्चना गुप्ता मेरे बड़े भाई के मित्र की पत्नी थीं और हमारा परिवार उन्हें ‘भाभी’ की तरह मानता था। इस घटना से मेरे अपने परिवार को भी गहरा दुख पहुंचा है।"

विधायक ने अपने सामाजिक कार्यों, अच्छे आचरण और पहले काट चुके एक महीने की जेल का हवाला देते हुए कम से कम सजा की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

बाकी आरोपी हुए बरी, ऊपरी अदालत जा सकते हैं विधायक

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 6 जून को ही राजू कुमार सिंह को दोषी करार दे दिया था, जबकि सजा का ऐलान आज किया गया।

सह-आरोपियों को राहत: साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने इस मामले में नामजद विधायक की पत्नी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सभी आरोपों से पहले ही बरी कर दिया है।

राजनीतिक असर: राजू कुमार सिंह बिहार विधानसभा में बीजेपी के मौजूदा विधायक हैं, इसलिए इस फैसले को राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस सजा के खिलाफ अब विधायक पक्ष द्वारा ऊपरी अदालत (हाईकोर्ट) में अपील दायर की जा सकती है।