कोलकाता: मतुआ समुदाय की आराध्य मातृसत्ता 'बड़ो माँ' (बीणापाणि देवी) की पुण्यतिथि के अवसर पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में नागरिकता और पहचान को लेकर एक नया घमासान छिड़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बंगाली में एक विस्तृत बयान जारी कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर मतुआ समुदाय को "अनिश्चितता" और "भ्रम" के जाल में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है।
नागरिकता के नाम पर 'साजिश' का आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पीढ़ियों से इस देश के नागरिक हैं, मतदान कर रहे हैं और सरकारें चुन रहे हैं, आज उनकी पहचान पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
"यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भाजपा सरकार की साजिश के कारण मतुआ भाइयों और बहनों को एक अस्थिर और भ्रमित स्थिति में धकेल दिया गया है। नागरिकता देने के बहाने राजनीतिक खेल खेले जा रहे हैं।" — ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर जताई चिंता
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दावा किया कि SIR (स्टेटस इंक्वायरी रिपोर्ट) के जरिए जानबूझकर लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार:
उत्तर 24 परगना: 1.42 लाख से अधिक नाम हटाए गए।
नदिया: 2.76 लाख से अधिक नाम सूची से गायब।
प्रमुख क्षेत्र: गायघाटा, बनगाँव उत्तर/दक्षिण, बागदा और कल्याणी जैसे मतुआ बहुल इलाकों में हजारों की संख्या में नाम काटे गए हैं।
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वे बंगाल के लोगों के अधिकारों को छीनने की किसी भी कोशिश के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।
भाजपा का पलटवार: 'भ्रम ममता ने पैदा किया'
दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री पर ही समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता राहुल सिन्हा ने कहा:
"यह भ्रम ममता बनर्जी द्वारा पैदा किया गया है। CAA के खिलाफ उनके कड़े रुख के कारण उन्होंने मतुआ समुदाय को नागरिकता के लिए आवेदन करने से रोका। उनके द्वारा गुमराह किए जाने के कारण ही आज बड़ी संख्या में लोग सूची से बाहर रह गए हैं।"
मतुआ वोट बैंक और सियासी समीकरण
मतुआ समुदाय उत्तर 24 परगना और नदिया जिले की दर्जनों विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। पिछले कुछ चुनावों में यह समुदाय तृणमूल से छिटककर भाजपा की ओर झुका था, लेकिन हालिया मतदाता सूची विवाद और नागरिकता की जटिलताओं ने समुदाय के भीतर एक 'डर' (Fear Psychosis) पैदा कर दिया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 'बड़ो माँ' की पुण्यतिथि पर ममता बनर्जी का यह भावनात्मक और आक्रामक संदेश मतुआ वोट बैंक को वापस अपनी ओर खींचने की एक बड़ी रणनीतिक कोशिश है।





