पंचकूला | विशेष संवाददाता पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शनिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बहुचर्चित रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत के पूर्व फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए राम रहीम को 'संदेह का लाभ' (Benefit of Doubt) दिया है।

अदालत का निर्णय: साक्ष्यों की कड़ी रही कमजोर

हाई कोर्ट ने मामले की गहन सुनवाई और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि डेरा प्रमुख के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्य उनकी संलिप्तता को पूरी तरह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया:

"अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य इतने सुदृढ़ नहीं हैं कि राम रहीम के विरुद्ध आपराधिक साजिश के आरोपों को संदेह से परे स्थापित किया जा सके।"

अन्य तीन दोषियों की सजा बरकरार

जहाँ एक ओर डेरा प्रमुख को राहत मिली है, वहीं मामले के अन्य तीन दोषियों— कुलदीप, निर्मल और किशन लाल के लिए हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने उनके खिलाफ उपलब्ध गवाहियों और साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को यथावत रखने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला निडर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा है। उन्होंने अपने समाचार पत्र में डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों और साध्वियों के शोषण से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

वर्ष 2002: पत्रकार छत्रपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

जांच का जिम्मा: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

विशेष अदालत का फैसला: सीबीआई कोर्ट ने लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद राम रहीम और अन्य को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ दोषियों ने हाई कोर्ट में अपील की थी।

अभी जेल में ही रहेंगे डेरा प्रमुख

भले ही छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया गया हो, लेकिन उनकी रिहाई का रास्ता अभी साफ नहीं है। डेरा प्रमुख वर्तमान में रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं, जहाँ वे दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं।

फैसले के मायने

इस फैसले ने एक बार फिर कानूनी गलियारों में साक्ष्यों की महत्ता और जांच की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। जहाँ बचाव पक्ष इसे सत्य की जीत बता रहा है, वहीं पीड़ित पक्ष के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका माना जा रहा है।