बीजापुर।

माओवादी आतंक और हिंसा के साए में दो दशकों से अधिक समय तक वीरान रहे बीजापुर जिले के पीडिया क्षेत्र में आखिरकार शिक्षा की एक नई सुबह हुई है। सलवा जुडूम के दौर में बंद हुए 11 स्कूलों में 21 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद दोबारा पढ़ाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और बीजापुर कलेक्टर विश्वदीप की विशेष दूरदर्शी पहल के चलते क्षेत्र के 11 अलग-अलग गांवों के 539 बच्चों को अब अपने ही गांव में शिक्षा का मौलिक अधिकार मिल गया है।

इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए पीडिया में भव्य 'शाला प्रवेशोत्सव' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा ने दीप प्रज्ज्वलित कर इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने स्कूल पहुंचे नन्हें बच्चों का तिलक लगाकर और लड्डू खिलाकर स्वागत किया, साथ ही शिक्षादूतों को पठन-पाठन की सामग्री और बच्चों को नए स्कूल बैग वितरित किए।

इन 11 गांवों में फिर लौटेगी ज्ञान की रोशनी

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की बढ़ती मुस्तैदी और माओवाद से मुक्ति के बाद अब इन सुदूरवर्ती गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा:

स्कूलों की सूची: पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी।

"शिक्षा ही विकास की मजबूत नींव"

"हमारी सरकार हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अभिभावकों से अपील है कि वे बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें। इन सभी पुन: संचालित विद्यालयों में पक्के भवन, शुद्ध पेयजल और बिजली जैसी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं जिला प्रशासन द्वारा शीघ्र ही प्राथमिकता से उपलब्ध कराई जाएंगी।"

— जानकी कोरसा, अध्यक्ष, जिला पंचायत

जिला प्रशासन का बड़ा अभियान: इस साल अब तक 37 स्कूल हुए बहाल

बीजापुर जिले में बुनियादी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रशासन युद्धस्तर पर काम कर रहा है।

स्कूल का स्तरइस वर्ष बहाल किए गए स्कूलों की संख्या
प्राथमिक विद्यालय (Primary Schools)20
उच्च प्राथमिक विद्यालय (Upper Primary Schools)17
कुल बहाल हुए स्कूल37

"हर गांव तक शिक्षा पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता"

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) राजेश पांडे ने बताया कि बंद पड़े स्कूलों को खोजने और उन्हें दोबारा सुचारू रूप से चलाने का अभियान लगातार जारी है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बीजापुर के कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि 21 वर्षों से बंद पड़े इन विद्यालयों को दोबारा शुरू करना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी थी। क्षेत्र में शांति बहाली के बाद अब प्रत्येक गांव के अंतिम छोर पर बैठे बच्चे तक शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। यह बदलाव बस्तर की एक नई और सकारात्मक पहचान को बयां करता है।