जगदलपुर/रायपुर,

छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग इस वक्त मलेरिया के एक बेहद गंभीर और डरावने रूप की चपेट में है। इस साल संभाग में मलेरिया के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि बड़ी संख्या में मरीजों में 'मिक्स मलेरिया' (Mixed Malaria) की पुष्टि हो रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह स्थिति सामान्य मलेरिया की तुलना में कहीं अधिक जानलेवा और जटिल है, जिसमें एक ही मरीज के शरीर में दो अलग-अलग परजीवी एक साथ हमला कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से लेकर अब तक बस्तर संभाग में कुल 8,426 मलेरिया के मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 254 मरीज मिक्स मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं। विभाग अब तक 6.63 लाख से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल की जांच कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

क्या है 'मिक्स मलेरिया' और यह क्यों है खतरनाक?

चिकित्सकों के अनुसार, मिक्स मलेरिया तब होता है जब एक संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से पी. फाल्सीपेरम (P. falciparum) और पी. विवैक्स (P. vivax) दोनों तरह के परजीवी एक साथ इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

पी. फाल्सीपेरम: यह शरीर में बेहद गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स पैदा करता है और सीधे अंगों को नुकसान पहुंचाता है।

पी. विवैक्स: यह शरीर में दोबारा संक्रमण (रिलेप्स) के खतरे को काफी ज्यादा बढ़ा देता है।

जिलेवार आंकड़े: बीजापुर में सबसे भीषण प्रकोप

बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में मलेरिया का प्रकोप इस प्रकार है:

बीजापुर: 3,173 मरीज (सबसे प्रभावित जिला)

सुकमा: 1,686 मरीज

दंतेवाड़ा: 1,344 मरीज

नारायणपुर: 896 मरीज

बस्तर: 809 मरीज

कोंडागांव: 329 मरीज

कांकेर: 189 मरीज

दिखें ये लक्षण, तो तुरंत हो जाएं सावधान

विशेषज्ञों के अनुसार, मिक्स मलेरिया होने पर मरीज के शरीर में निम्नलिखित लक्षण तेजी से उभरते हैं:

तेज बुखार आना और बार-बार बुखार का लौटकर आना।

शरीर में अत्यधिक कंपन (ठंड लगना) और तेज सिरदर्द।

उल्टी होना और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी महसूस होना।

शरीर में खून की भारी कमी (एनीमिया) होना।

अंगों के फेल होने का खतरा:

यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह गंभीर स्थिति मरीज के दिमाग (सेरेब्रल मलेरिया), किडनी और लीवर को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है।

क्यों फैल रहा है संक्रमण?

ग्राउंड रिपोर्ट और विशेषज्ञों के मुताबिक, इस प्रकोप के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में घरों के आसपास बड़े पैमाने पर पानी का जमा होना, मच्छरों के लार्वा को समय पर नष्ट न कर पाना, फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव का बेअसर होना तथा स्थानीय आबादी द्वारा मच्छरदानियों का कम इस्तेमाल करना इस संक्रमण के तेजी से फैलने की मुख्य वजहें हैं।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बस्तर वासियों से अलर्ट रहने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि लोग अपने घरों के आसपास जलजमाव न होने दें, नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें और किसी भी प्रकार का बुखार होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ब्लड टेस्ट कराकर सही समय पर इलाज शुरू करें।