नई दिल्ली:
स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले पारंपरिक ‘एट होम’ (At Home) समारोह के निमंत्रण पत्र इस बार भारत की विविधतापूर्ण और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनूठी छाप लेकर आए हैं। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी विशेष निमंत्रण पत्रों में देश की पारंपरिक लोक कलाओं को केंद्रीय थीम बनाया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध ढोकरा और पिटवा कला के साथ-साथ गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की विविध कला शैलियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।
संस्कृति और रचनात्मकता का अद्भुत संगम
राष्ट्रपति भवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष का निमंत्रण पत्र समुदाय, रचनात्मकता और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना को समर्पित है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की समृद्ध और प्राचीन कलात्मक परंपराओं को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान प्रदान करना है।
कार्ड और लिफाफे में दिखीं ये प्रमुख हस्तशिल्प कलाएँ:
मध्य प्रदेश की 'बाघ वस्त्र कला': निमंत्रण पत्र को सहेजने के लिए तैयार किए गए विशेष कपड़े के लिफाफे में मध्य प्रदेश के धार जिले की पारंपरिक बाघ (Bagh) प्रिंट का इस्तेमाल किया गया है।
छत्तीसगढ़ की 'ढोकरा' और 'पिटवा' कला: कार्ड पर छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध ढोकरा (लॉस्ट वैक्स मेटल कास्टिंग) और पिटवा (लोह कला) को अत्यंत खूबसूरती से उकेरा गया है।
मध्य प्रदेश की 'भील पेंटिंग': आदिवासी संस्कृति की जीवंतता को दर्शाती भील चित्रकला को स्थान दिया गया है।
गोवा की 'अज़ुलेजो टाइल पेंटिंग': गोवा की औपनिवेशिक और स्थानिक हस्तकला की परिचायक अज़ुलेजो टाइल कला को प्रदर्शित किया गया है।
महाराष्ट्र की 'वारली पेंटिंग': महाराष्ट्र की विश्वप्रसिद्ध प्राकृतिक और सामुदायिक वारली चित्रकला कार्ड की शोभा बढ़ा रही है।
स्थानीय कला और कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय पहचान
राष्ट्रपति भवन का वक्तव्य: "यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को न केवल सम्मानित करती है, बल्कि हमारी सदियों पुरानी लोक कलाओं को एक व्यापक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।"
छत्तीसगढ़ की ढोकरा और पिटवा जैसी पारंपरिक कलाओं को राष्ट्रपति भवन के इस प्रतिष्ठित निमंत्रण पत्र पर स्थान मिलने से न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को एक नया आयाम मिला है, बल्कि देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों का मान भी बढ़ा है।





