अयोध्या।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की राशि में गबन और चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज कर ली गई है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर, मुख्यमंत्री के सीधे निर्देश पर गुरुवार शाम रामजन्मभूमि थाने में आठ नामजद और कुछ अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी आठों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे उच्चाधिकारियों द्वारा गहन पूछताछ की जा रही है।
यह कार्रवाई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर की गई है। हालांकि, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं में दर्ज इस एफआईआर में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों—चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के नाम शामिल नहीं हैं।
20 दिनों की जांच और अखिलेश यादव के ट्वीट से गरमाया मामला
राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का यह संवेदनशील मामला सबसे पहले 5 जून को आंतरिक रूप से प्रकाश में आया था, जिसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुपचाप धन की रिकवरी के प्रयास शुरू किए थे। लेकिन 7 जून को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सोशल मीडिया (X) पोस्ट के बाद यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने संज्ञान लिया, जिसके बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र तत्काल अयोध्या पहुंचे। इसके तीन दिन बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT ने 6 दिनों के भीतर करीब 150 कर्मचारियों के बयान दर्ज कर मंगलवार को अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल केस दर्ज करने का आदेश दिया।
मुख्य आरोपी और उनके पास से हुई बरामदगी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मंदिर व्यवस्था से जुड़े रसूखदार लोगों से लेकर बैंक के पूर्व अधिकारी तक शामिल हैं:
रामशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू': ट्रस्ट महासचिव चंपतराय का पूर्व ड्राइवर। मंदिर के लगभग सभी कार्यों में इसका सीधा दखल था और दानपात्रों की चाभियां भी इसी के पास थीं।
अनुकल्प मिश्र (मास्टरमाइंड): नकदी की गणना में शामिल मुख्य कर्मी। इसे इस पूरे गबन का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इसके कौशलपुरी स्थित आवास से 20 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।
लवकुश मिश्र: अनुकल्प का बहनोई। इसके घर से भी करीब 10 लाख रुपये नकद मिले हैं।
मनीष यादव: टिन्नू यादव का भतीजा, जिसे कुछ महीने पहले ही काम पर रखा गया था। इसके पास से भी नकदी बरामद हुई है।
सुभाष श्रीवास्तव: केनरा बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद इसे कैश की गिनती और उसकी निगरानी के काम में लगाया गया था।
अविनाश शुक्ल: अयोध्या का निवासी और नोटों की गिनती में शामिल कर्मी। इसके बैंक खाते से 5 लाख रुपये रिकवर किए गए हैं।
करुणेश पांडेय व रमाशंकर मिश्र: नकदी की गणना से जुड़े अन्य कर्मी, जिनके पास से नकदी और संदिग्ध लेन-देन के सबूत मिले हैं।
सूत्रों का कहना है: "फिलहाल आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन जांच के दायरे में कई और नाम हैं। आने वाले दिनों में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है और कुछ नए बड़े खुलासे भी हो सकते हैं।"
इन कड़े कानूनी प्रावधानों (BNS) के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
आरोपियों पर केवल चोरी का नहीं, बल्कि आस्था के केंद्र से संगठित रूप से धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज हुआ है। एफआईआर में शामिल मुख्य धाराएं निम्नलिखित हैं:
| धारा (BNS / अधिनियम) | अपराध का विवरण | अधिकतम सजा |
|---|---|---|
| धारा 306 | संपत्ति की चोरी | 7 वर्ष का कारावास |
| धारा 316(5) | आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) | आजीवन कारावास या 10 वर्ष की सजा |
| धारा 317(4) व (5) | चोरी या गबन की संपत्ति को छिपाना या ठिकाने लगाना | 3 से 7 वर्ष तक की सजा |
| धारा 61 | योजनाबद्ध रूप से आपराधिक षड़यंत्र रचना | मुख्य अपराध के बराबर सजा |
| धारा 3(5) | सामूहिक रूप से संगठित होकर अपराध को अंजाम देना | मुख्य अपराध के बराबर सजा |
| धारा 305 | पूजा या उपासना स्थल से संपत्ति की चोरी | 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना |
| भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (धारा 13) | लोक सेवक या सौंपे गए पद का दुरुपयोग कर बेईमानी से गबन | 4 से 10 वर्ष तक का कारावास |
घटनाक्रम: 5 जून से 25 जून तक का सफर
05 जून: मंदिर प्रशासन को पहली बार आंतरिक स्तर पर गबन का पता चला।
07 जून: सपा नेताओं के आरोपों और अखिलेश यादव के 'X' पोस्ट के बाद मामला मीडिया में आया। चंपतराय ने स्पष्टीकरण जारी किया।
10 जून: PMO ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी; नृपेंद्र मिश्र ने अयोध्या पहुंचकर 4 घंटे बैठक की।
13 जून: चौतरफा दबाव के बाद राज्य सरकार द्वारा SIT का गठन।
15 से 20 जून: SIT ने चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राय समेत 150 लोगों से पूछताछ की। बैंक खाते और 11 महीने के वित्तीय दस्तावेज खंगाले गए।
23 जून: SIT ने 20 पन्नों की अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी।
25 जून: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज और सभी 8 आरोपी गिरफ्तार।





