रायपुर। राजधानी रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) ऑडिटोरियम में आयोजित 'आपातकाल स्मृति दिवस' के अवसर पर लोकतंत्र के सच्चे प्रहरियों का भव्य सम्मान किया गया। इस गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शिरकत कर आपातकाल के दौरान देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जेल और यातनाएं सहने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सेनानियों के संघर्ष पर आधारित विशेष स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया और राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के युवा विजेताओं को पुरस्कृत भी किया।

"राष्ट्र प्रथम की भावना ही भारत की वास्तविक शक्ति" — इंद्रेश कुमार

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि हमारे जीवन का मूल्य है। आपातकाल के दौर को भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा बताते हुए उन्होंने कहा कि उस काले दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों को कुचल दिया गया था, लेकिन हमारे सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहकर भी लोकतांत्रिक आदर्शों को जीवित रखा।

उन्होंने युवाओं से 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा:

"इतिहास को याद रखना केवल अतीत को जानना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। राष्ट्र, ज्ञान और धर्म प्रथम की भावना ही भारत की असली ताकत है।" उन्होंने युवाओं से नशामुक्त, स्वच्छ और समरस समाज के निर्माण में योगदान देने की अपील की।

सीएम साय ने साझा कीं भावुक यादें: "संघर्ष का वह दौर भुलाया नहीं जा सकता"

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में आपातकाल को भारतीय इतिहास का कभी न भूलने वाला कालखंड बताया। अपने पारिवारिक संघर्ष को याद करते हुए मुख्यमंत्री भावुक हो उठे। उन्होंने बताया:

उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय ने आपातकाल के दौरान 19 महीनों तक जेल जीवन की कठिन यातनाएं झेली थीं।

उस दौर में जब घर के मुखिया जेल चले जाते थे, तो परिवारों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो जाता था।

उस कठिन समय में स्वयंसेवक भेष बदलकर सेनानियों के घरों तक अनाज पहुंचाते थे ताकि कोई परिवार भूखा न सोए।

मुख्यमंत्री ने इस बात की सराहना की कि आने वाली पीढ़ी को इस संघर्ष से अवगत कराने के लिए इस विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की एक प्रशंसनीय पहल की जा रही है।

1975 का आपातकाल सजग रहने की प्रेरणा देता है: डॉ. रमन सिंह

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर और क्रूर चुनौती था। प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों का निलंबन और संविधान में किए गए मनमाने संशोधनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह समय अंततः भारतीय जनता की जागरूकता और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बनकर उभरा। यह दिवस हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।

निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान: युवाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

आपातकाल स्मृति दिवस के मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में पूरे प्रदेश से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने विजेताओं को नकद प्रोत्साहन राशि और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया:

विद्यालय स्तर (विषय: "आपातकाल कभी विस्मृत न हो")

प्रथम स्थान: जागृति जांगड़े (जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर) - ₹31,000 की प्रोत्साहन राशि।

द्वितीय स्थान: सूरज तांडिया (विवेकानंद विद्यापीठ, कोरबा)।

तृतीय स्थान: अंश देशमुख (अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग)।

महाविद्यालय स्तर (विषय: "25 जून : संविधान हत्या दिवस")

प्रथम स्थान: सु कल्याणी पटले (रायपुर)।

द्वितीय स्थान: सीमा साव (रायगढ़)।

तृतीय स्थान: सु खुशबू (दुर्ग)।

गरिमामयी समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक गोमती साय, डॉ. रामप्रताप सिंह (अध्यक्ष, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल), संजय श्रीवास्तव (अध्यक्ष, नागरिक आपूर्ति निगम), दीपक म्हस्के (चेयरमैन, सीजीएमएससी), वर्णिका शर्मा (अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग), महामण्डलेश्वर अजय रामदास, अखिलेश सोनी, लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर तिवारी और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने सहित भारी संख्या में प्रबुद्धजन, लोकतंत्र सेनानी और उनके परिजन उपस्थित रहे।