बांका: बिहार सरकार की 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके सूक्ष्म व्यवसायों को पंख देने की पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। योजना के तहत पहली किस्त प्राप्त कर अपना स्वरोजगार शुरू करने वाली जीविका दीदियों को अब व्यवसाय के विस्तार के लिए दूसरी किस्त के रूप में 20-20 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। बांका जिले में ग्राम संगठन स्तर पर इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके तहत अब तक करीब तीन हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।
जांच और भौतिक सत्यापन के बाद जारी होगी राशि
जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) राकेश कुमार ने बताया कि दूसरी किस्त का लाभ केवल उन्हीं जीविका दीदियों को मिलेगा, जिन्होंने पहली किस्त की राशि का सही उपयोग कर सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय शुरू किया है।
सख्त जांच प्रक्रिया: ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित दस्तावेजों का बारीकी से सत्यापन किया जाएगा।
ग्राउंड वेरिफिकेशन: फील्ड स्तर के अधिकारी दीदियों के व्यवसाय का भौतिक (Physical) सत्यापन और मूल्यांकन करेंगे।
सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर: रोजगार संचालित पाए जाने और मानक खरे उतरने पर आवेदन स्वीकृत कर राशि सीधे लाभुकों के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी।
5 किस्तों में मिलेगी कुल 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद
बांका जिले में अब तक 3 लाख 50 हजार से अधिक जीविका दीदियों को योजना की पहली किस्त के रूप में 10-10 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है। सरकार चरणबद्ध तरीके से प्रत्येक पात्र लाभुक को कुल ₹2 लाख तक की सहायता उपलब्ध कराएगी:
| किस्त | वित्तीय सहायता | स्थिति / शर्त |
|---|---|---|
| पहली किस्त | ₹10,000 | दिए जा चुके हैं (स्वरोजगार शुरू करने हेतु) |
| दूसरी किस्त | ₹20,000 | आवेदन प्रक्रिया जारी (रोजगार विस्तार हेतु) |
| तीसरी किस्त | ₹40,000 | सफल संचालन व मूल्यांकन के बाद |
| चौथी किस्त | ₹80,000 | सफल संचालन व मूल्यांकन के बाद |
| पांचवीं किस्त | ₹60,000 | अंतिम चरण सहायता |
| कुल सहायता | ₹2,00,000 | प्रति पात्र जीविका दीदी |
आवेदन में तेजी लाने के निर्देश
जीविका प्रबंधन ने जिले के सभी ग्राम संगठनों को निर्देश जारी किया है कि वे अधिक से अधिक पात्र दीदियों के आवेदन दर्ज कराएं और आवश्यक दस्तावेजों की समय पर जांच सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी दीदी को वित्तीय स्वीकृति मिलने में अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े।





