कैचलाइन: मुख्यमंत्री का विपक्ष को दोटूक जवाब— पेड़ कटने के बदले लगाए जा रहे हैं उससे ज्यादा पौधे, नई उद्योग नीति में भी किया गया है अनिवार्य।
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई को लेकर जारी सियासी घमासान और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का एक बड़ा बयान सामने आया है। सीएम साय ने इस पूरे मामले पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि लोगों को यह गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए कि सरकार केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विकास कार्यों के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं, तो उसके बदले उससे कहीं ज्यादा पौधे रोपे भी जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विकास और पर्यावरण के संतुलन को रेखांकित करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
"सड़क आसमान में नहीं बनेगी, जमीन की जरूरत तो होगी ही"
मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास का उदाहरण देते हुए सीधे शब्दों में कहा कि विकास कार्यों और सड़क निर्माण के लिए जमीन की आवश्यकता होती है, सड़कें आसमान में नहीं बनाई जा सकतीं। उन्होंने अपनी खुद की विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जो नेशनल हाईवे बना था, वह पहले की जरूरतों के हिसाब से था। आज के आधुनिक समय और ट्रैफिक के हिसाब से सड़कों को चौड़ा करने के लिए पेड़ों की कटाई अपरिहार्य हो जाती है, जिसे व्यावहारिक रूप से समझने की जरूरत है।
नई उद्योग नीति में 'वृक्षारोपण' हुआ अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने एक बड़े नीतिगत फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर कड़े कदम उठाए हैं:
अनिवार्य वृक्षारोपण: सरकार ने नई उद्योग नीति में इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि यदि कोई उद्योगपति या परियोजना के तहत पेड़ काटे जाते हैं, तो उनके बदले नए पेड़ लगाना पूरी तरह अनिवार्य होगा।
44% वन क्षेत्र का गौरव: छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक रूप से 44 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जिसे बनाए रखना और बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।
सरकार के प्रयासों से 2.5 फीसदी बढ़ा वन क्षेत्र
विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए सीएम साय ने राज्य में हरियाली बढ़ाने के लिए जारी योजनाओं का ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि:
कैम्पा और पीएम मोदी की मुहिम: पिछले दो सालों में सरकार कैम्पा (CAMPA) योजना के तहत बड़े पैमाने पर वनीकरण कर रही है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड पौधे लगाए गए हैं।
सकारात्मक परिणाम: इन सभी गंभीर प्रयासों का ही नतीजा है कि राज्य के वन क्षेत्र में ढाई प्रतिशत (2.5%) की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विपक्ष के आरोपों के बीच सरकार का रुख
पृष्ठभूमि: गौरतलब है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर विपक्षी दल लगातार साय सरकार को घेर रहे हैं और बड़े पैमाने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार विकास की रफ्तार को धीमा किए बिना पर्यावरण को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रही है, जहां 'पेड़ काटने' और 'पेड़ लगाने' के बीच एक कड़ा कानूनी संतुलन (صנعت नीति के माध्यम से) बनाया गया है।





