नई दिल्ली | दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एटीएम धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह एटीएम मशीन में तकनीकी छेड़छाड़ कर कार्ड फंसा देता था और फिर मदद के बहाने लोगों के खातों से मेहनत की कमाई उड़ा लेता था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बिहार के गया निवासी रवि कुमार भारती के रूप में हुई है।
50 से अधिक वारदातों को दे चुका है अंजाम
डीसीपी (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम के अनुसार, रवि कुमार भारती की गिरफ्तारी से एटीएम धोखाधड़ी के 5 मामलों को सुलझा लिया गया है। पूछताछ में आरोपी ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में 50 से अधिक ऐसी घटनाओं को अंजाम देने की बात कबूली है। वह पहले भी 7 आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। तकनीकी जांच में अब तक वह 22 पीड़ितों से जुड़ा पाया गया है, जिनमें से 9 की पहचान हो चुकी है।
ठगी का 'फेविक्विक' स्टाइल: ऐसे फंसाते थे जाल में
जांच में इस गिरोह के काम करने का बेहद शातिर तरीका सामने आया है:
मशीन से छेड़छाड़: गिरोह के सदस्य एटीएम कार्ड स्लॉट के अंदर गोंद (ग्लू) लगा देते थे, जिससे पीड़ित का कार्ड अंदर ही फंस जाता था।
नकली हेल्पलाइन: ये लोग एटीएम कियोस्क पर अपना 'नकली कस्टमर केयर नंबर' चिपका देते थे।
मदद का झांसा: जब कार्ड फंस जाता, तो आरोपी बैंक अधिकारी बनकर बात करते और पीड़ित का भरोसा जीतकर उनका पिन नंबर पता कर लेते थे।
कार्ड की अदला-बदली: कई बार ये पीड़ितों को बातों में उलझाकर धोखे से दूसरा एटीएम कार्ड थमा देते थे।
कम पढ़े-लिखे लोग थे निशाने पर
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह जानबूझकर उन एटीएम को चुनता था जहाँ कम पढ़े-लिखे या बुजुर्ग लोग आते थे, ताकि उन्हें आसानी से झांसा दिया जा सके। जब पीड़ित कार्ड फंसने के बाद घर लौट जाता था, तब ये लोग फंसा हुआ कार्ड निकालकर खाते से पैसे उड़ा लेते थे।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
एसीपी रमेश चंद्र लांबा और इंस्पेक्टर शिवराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सर्विलांस की मदद ली। टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को छतरपुर के राजपुर खुर्द इलाके से दबोच लिया। इससे पहले गिरोह के दो अन्य सदस्य, रोशन कुमार और पिंटू कुमार को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, जिन्होंने रवि के नाम का खुलासा किया था।
पुलिस की सलाह: एटीएम में कार्ड फंसने पर किसी अनजान व्यक्ति की मदद न लें और न ही अपना पिन साझा करें। हमेशा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर दिए गए हेल्पलाइन नंबरों का ही उपयोग करें।





