नई दिल्ली:

देश की कर व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक सुधार होने जा रहा है। सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) ढांचे को अधिक सरल, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित बनाने के लिए ‘जीएसटी 2.0’ (GST 2.0) लागू करने की तैयारी में है। आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में कारोबारियों के अटके करोड़ों रुपये निकालने, अनुपालन का बोझ घटाने और अनावश्यक कानूनी मुकदमों को खत्म करने से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है।

1. अटकी पूंजी और ब्लॉक क्रेडिट (Section 17(5)) को अनलॉक करने की योजना

काउंसिल की टेबल पर सबसे बड़ा प्रस्ताव इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दायरा बढ़ाने का है, जिससे कंपनियों की फंसी हुई वर्किंग कैपिटल अनलॉक होगी:

  • प्लांट एवं मशीनरी पर रिफंड: प्लांट, मशीनरी और इनपुट सर्विसेज पर चुकाए गए टैक्स को 5 साल में मासिक किस्तों के ज़रिए रिफंड करने पर विचार किया जा रहा है।
  • धारा 17(5) के तहत बंद क्रेडिट की वापसी:
    • कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, आउटडोर कैटरिंग पर आईटीसी।
    • टेलीकॉम टावर, फैक्ट्रियों के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन और 13 सीटों तक वाली गाड़ियों (लीजिंग, मेंटेनेंस व इंश्योरेंस) पर टैक्स क्रेडिट देने का प्रस्ताव।
    • मुफ़्त सैंपल और एक्सपायर होकर नष्ट होने वाले सामान पर फंसा क्रेडिट अनलॉक होगा।
  • इनवर्टेड ड्यूटी रिफंड: 5% टैक्स स्लैब वाले सेक्टर्स (फूड, फार्मा, टेक्सटाइल, ईवी) में फंसा आईटीसी रिफंड होने से नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

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2. सप्लायर की टैक्स चोरी पर ईमानदार खरीदार को सुरक्षा

जीएसटी में लिटिगेशन (विवाद) की सबसे बड़ी वजह यह रही है कि यदि चेन में ऊपर बैठा सप्लायर टैक्स जमा नहीं करता था, तो टैक्स विभाग खरीदार का आईटीसी ब्लॉक कर देता था।

  • नया नियम: यदि लेन-देन (Invoice Match) पूरी तरह सही है, तो खरीदार का आईटीसी नहीं छीना जाएगा।
  • रिकवरी: टैक्स की पेनल्टी और रिकवरी सीधे डिफ़ॉल्ट करने वाले सप्लायर से की जाएगी।
  • ऑटोमेटेड रिफंड: कस्टम्स और आरबीआई का एक्सपोर्ट डेटा सीधे जीएसटी पोर्टल से जुड़ेगा, जिससे रिफंड के लिए अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगें।

3. एमएसएमई (MSMEs) और छोटे कारोबारियों को प्रशासनिक राहत

क्षेत्र / विषयप्रस्तावित राहत / सुधार
रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाऑटोमेटेड रूट से सिर्फ 3 वर्किंग डेज में नया रजिस्ट्रेशन मिलेगा। नाम, पार्टनर या एड्रेस चेंज भी ऑटोमैटिक होगा।
रिटर्न फाइलिंग (₹5 करोड़ टर्नओवर तक)अनरजिस्टर्ड ग्राहकों को बेचने वाले व्यापारियों को साल में 1 बार रिटर्न और तिमाही टैक्स भुगतान की छूट संभव।
छोटे नोटिसों पर रोक₹10,000 से कम के मामलों में कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करने पर पूरी रोक। (यह लंबित मामलों पर भी लागू होगा)।
गिरफ्तारी और पेनल्टीछोटे और तकनीकी मामलों में बेवजह गिरफ्तारी और सजा के कड़े प्रावधानों को हटाया जाएगा।

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4. आईटी एवं एक्सपोर्ट सेक्टर (IT / ITeS) के लिए प्रोत्साहन

  • विदेशी ब्रांच ऑफिस: आईटी कंपनियों के विदेशी ब्रांच ऑफिस को दी जाने वाली सेवाओं को 'एक्सपोर्ट' का दर्जा मिलेगा, जिससे वे पूर्ण आईटीसी के हकदार होंगे।
  • SEZ डिलीवरी: यदि विदेशी खरीदार का सामान देश के स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में डिलीवर होता है और भुगतान विदेशी मुद्रा में आता है, तो उसे भी एक्सपोर्ट माना जाएगा।

तकनीक और रियल-टाइम इनवॉइस डेटा मैचिंग के चलते अब जीएसटी सिस्टम पूरी तरह रिस्क-बेस्ड और ऑटोमेटेड हो चुका है। सरकार का मकसद व्यापारियों पर से प्रशासनिक दबाव हटाकर भारत के कारोबारी माहौल को बेहतर बनाना है।

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