बराड़ा: भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही बराड़ा के वार्ड नंबर 10 और 11 के निवासियों के लिए मुसीबतें पहाड़ बनकर टूटी हैं। पिछले दो दिनों से इन क्षेत्रों में पानी की भीषण किल्लत बनी हुई है। आलम यह है कि जो पानी नलों से आ रहा है, वह इतना मटमैला और दूषित है कि उसे पीने की बात तो दूर, घरेलू कार्यों के लिए इस्तेमाल करना भी मुहाल हो गया है। स्थानीय निवासी अब बीमारियों के फैलने की आशंका से दहशत में हैं।

विभाग की लापरवाही: 8 महीने पहले से पता थी खराबी

समस्या की जड़ वृद्ध आश्रम परिसर में स्थित नलकूप (ट्यूबवेल) का बोर खराब होना है। चौंकाने वाली बात यह है कि जलापूर्ति विभाग को इस तकनीकी खराबी की जानकारी कई महीनों से थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग ने समय रहते नया बोर करवाने के बजाय हाथ पर हाथ धरे रहने का काम किया, जिसका खामियाजा आज हजारों लोग भुगत रहे हैं।

वैकल्पिक व्यवस्था भी 'ऊंट के मुंह में जीरा'

वर्तमान में विभाग बस अड्डा परिसर के दो नलकूपों से जलापूर्ति की कोशिश कर रहा है। लेकिन वार्ड नंबर 20 के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम दबाव (Low Pressure) के कारण पानी नहीं पहुँच पा रहा है। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था पूरी तरह फेल साबित हो रही है।

"यदि जल्द ही साफ पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो हम सरकार और विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। हमारी समस्याओं को हल्के में लेना विभाग बंद करे।" — स्थानीय निवासी (सोनू राणा, जोनी राणा व अन्य)

अधिकारियों का तर्क: "प्रयास जारी है"

इस गंभीर स्थिति पर जनस्वास्थ्य विभाग के जेई दीपक कुमार का कहना है कि नलकूप खराब होने के कारण गंदा पानी आ रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि:

नए बोर के लिए 7 से 8 महीने पहले ही एस्टीमेट (अनुमानित लागत) उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है।

फिलहाल अन्य नलकूपों से काम चलाया जा रहा है।

जल्द ही नया बोर लगाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।

आंदोलन की सुगबुगाहट

सोनू राणा, राजेश शर्मा और अमित धीमान सहित दर्जनों ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि विभाग का ढुलमुल रवैया अब बर्दाश्त नहीं होगा। यदि अगले 24 घंटों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो क्षेत्र के मंत्री और उच्च अधिकारियों के घेराव के साथ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।