चंडीगढ़ | मुख्य संवाददाता हरियाणा में सरकारी धन के गबन से जुड़े बहुचर्चित बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने 14 मई 2026 को चंडीगढ़ और पंचकूला सहित कुल सात स्थानों पर सघन छापेमारी की। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में CBI ने इस बड़ी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक इस मामले में 16 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

भ्रष्टाचार का गठजोड़: बैंक अधिकारी और लोक सेवक शामिल

हरियाणा सरकार की सिफारिश पर शुरू हुई इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

मिलीभगत का खेल: आरोप है कि IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने सरकारी विभागों के लोक सेवकों (Public Servants) के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची।

धोखाधड़ी का तरीका: सरकारी धन को विकास कार्यों में लगाने के बजाय, फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के जरिए व्यक्तिगत लाभ के लिए दुरुपयोग किया गया।

ज्वेलर्स से लेकर लाभार्थियों तक, हर जगह दबिश

CBI की टीम ने उन सभी कड़ियों को खंगालना शुरू कर दिया है जहाँ गबन की गई राशि का निवेश होने का संदेह है।

आवासीय परिसर: आरोपियों के घरों की तलाशी ली गई।

कारोबारी प्रतिष्ठान: छापेमारी के दायरे में कई प्रमुख ज्वेलर्स और कारोबारी भी आए, जिन्हें इस घोटाले का लाभार्थी माना जा रहा है।

निजी संस्थान: वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े अन्य निजी संस्थानों के ठिकानों पर भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

"छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं, जो सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि करते हैं।" — CBI प्रवक्ता

अहम साक्ष्य बरामद, जांच जारी

जांच एजेंसी ने दावा किया है कि जब्त की गई सामग्री में ऐसे डिजिटल प्रमाण मिले हैं, जो गबन की गई राशि के हस्तांतरण (Money Trail) को स्पष्ट करते हैं। CBI के अनुसार, 16 गिरफ्तारियों के बाद अब कई अन्य महत्वपूर्ण सुरागों पर काम किया जा रहा है।

निष्कर्ष और संदेश

यह कार्रवाई उन लोगों के लिए कड़ी चेतावनी है जो सरकारी पदों का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई का गबन करते हैं। CBI ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता और व्यापकता के साथ की जाएगी, ताकि सिस्टम के भीतर बैठे सफेदपोश अपराधियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।