जम्मू | अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने देश के मौजूदा हालात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। बुधवार रात हुए हमले में बाल-बाल बचने के बाद अब्दुल्ला ने कहा कि देश में 'नफरत का जाल' इस कदर फैल चुका है कि अब प्यार और दोस्ती की बात करने वालों के लिए जगह कम पड़ती जा रही है।

"20 साल से कर रहा था प्लानिंग": आरोपी का चौंकाने वाला खुलासा

पुलिस हिरासत में आरोपी (कमल) ने पूछताछ के दौरान जो खुलासा किया, उसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले 20 वर्षों से फारूक अब्दुल्ला पर हमले की योजना बना रहा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल्ला ने कहा:

"मैं उस शख्स को नहीं जानता और न ही मुझे यह पता है कि उसके इस कदम के पीछे क्या मंशा या पुरानी रंजिश थी। मुझे तो लगा कि वह पटाखों की आवाज है जो शादियों में अक्सर सुनाई देती है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए मुझे तुरंत वहां से निकाला।"

सुरक्षा व्यवस्था में चूक और अमित शाह का फोन

अब्दुल्ला ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा इंतजामों को नाकाफी बताते हुए प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि समारोह में कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं, फिर भी वहां पुलिस का पर्याप्त पहरा नहीं था।

गृह मंत्री का आश्वासन: घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फोन कर अब्दुल्ला की कुशलता जानी और मामले की उच्च स्तरीय जांच का भरोसा दिलाया।

जांच की मांग: अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार को इस बात की तह तक जाना चाहिए कि आखिर इस हमले के पीछे की असली वजह और साजिश क्या थी।

बढ़ता आतंकवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों की चुनौती

पूर्व मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर भी कड़ा प्रहार किया:

बेलगाम आतंकवाद: उन्होंने स्वीकार किया कि हम एक ऐसे दौर में हैं जहां आतंकवाद की जड़ें गहरी हो चुकी हैं और इसे पूरी तरह नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

अधिकारविहीन सरकार: अब्दुल्ला ने चुनी हुई सरकार की सीमाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना पर्याप्त अधिकारों के लोकतांत्रिक व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती।

पूर्ण राज्य का दर्जा: उन्होंने केंद्र सरकार को उनका वादा याद दिलाते हुए एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई।

"धर्म प्यार सिखाता है, नफरत नहीं"

भावुक होते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेदों को व्यक्तिगत रंजिश या हिंसा में बदलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अंत में संदेश दिया कि कोई भी धर्म नफरत का पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि केवल मोहब्बत और भाईचारे की सीख देता है।