भोपाल

मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य की व्यवस्था को बदलने वाले कई बड़े और ऐतिहासिक विधायी बदलाव करने जा रही है। रविवार को होने वाली महत्वपूर्ण जगदीशपुर कैबिनेट बैठक में पेश होने वाले 9 प्रमुख विधेयकों को मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दे दी है। इन नए कानूनों के जरिए जहाँ राज्य में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और उच्च शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, वहीं मनमानी करने वाले कोचिंग संस्थानों और फायर सेफ्टी के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ा शिकंजा कसा जाएगा।

कैबिनेट के 4 सबसे बड़े और क्रांतिकारी फैसले

1. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: बनेगा अलग 'बिजनेस सचिवालय'

उद्योगपतियों और निवेशकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने के लिए 'मप्र ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026' लाया जा रहा है।

तत्काल मंजूरी: नई इंडस्ट्री के लिए अब 4-5 महीने तक चलने वाली लंबी प्रक्रिया खत्म होगी। निवेशक के केवल एक हलफनामे (Affidavit) के आधार पर तत्काल 'लेटर ऑफ एस्टेब्लिशमेंट' जारी कर दिया जाएगा।

सिंगल विंडो क्लीयरेंस: मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में एक 'ईओडीबी (EODB) सचिवालय' खुलेगा, जहाँ उद्योग की सभी मंजूरियां एक ही छत के नीचे मिलेंगी। शुरुआत में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PCB) के सर्टिफिकेट की बाध्यता भी खत्म कर दी गई है।

2. कोचिंग संस्थानों पर नकेल: 16 साल से कम उम्र के बच्चों की नो-एंट्री

छात्रों में बढ़ते मानसिक तनाव और निजी कोचिंग सेंटरों की मनमानी रोकने के लिए 'मप्र निजी कोचिंग संस्थान विधेयक, 2026' पेश होगा।

उम्र सीमा तय: अब 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों (11वीं कक्षा से पहले) का कोचिंग में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

फीस रिफंड का नियम: कोचिंगों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और भ्रामक विज्ञापनों पर रोक रहेगी। यदि कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है, तो संस्थान को 10 दिन के भीतर यथानुपात आधार (Pro-rata basis) पर बची हुई फीस लौटानी होगी।

3. निजी यूनिवर्सिटी खोलना हुआ आसान: बहुमंजिला विवि को हरी झंडी

उच्च शिक्षा में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों को बेहद सरल बनाया गया है।

25 एकड़ की बाध्यता खत्म: पहले निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए कम से कम 25 एकड़ जमीन होना अनिवार्य था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।

कानून में अब 'पर्याप्त जमीन होना' शब्द जोड़ा गया है, जिससे अब शहरों के भीतर भी मल्टीस्टोरी (बहुमंजिला) प्राइवेट यूनिवर्सिटी आसानी से खोली जा सकेंगी।

4. नया फायर एक्ट: उल्लंघन पर लगेगा 'फायर सेफ्टी टैक्स'

सुरक्षा मानकों को सख्त करने के लिए 'मप्र अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026' लाया जा रहा है।

15 मीटर से ऊंची हर बहुमंजिला इमारत, 500 से अधिक छात्रों वाले स्कूल, 15 से ज्यादा कमरों वाले होटल, मॉल और 50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों के लिए 'फायर एनओसी' (Fire NOC) लेना अनिवार्य होगा। नियमों को तोड़ने पर भारी जुर्माने के साथ 'फायर सेफ्टी टैक्स' भी वसूला जाएगा।

मानसून सत्र में पेश होने वाले अन्य प्रमुख विधेयक

विधेयक का नाममुख्य प्रावधान और बदलाव
मप्र समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार के लिए सभी धर्मों पर एक समान कानून। लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन। पैतृक संपत्ति में महिला-पुरुष को समान अधिकार (जनजातियों को इससे छूट)।
मप्र श्रम संहिता, 20266 पुराने श्रम कानूनों की जगह केंद्रीय श्रम कोड लागू होगा। थियेटर और रेस्टोरेंट अब 24/7 (तीनों शिफ्टों में) चल सकेंगे।
मप्र नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026न्यायिक और पुलिस जांच प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक बनाया जाएगा।
मप्र धनवंतरी स्वास्थ्य विवि विधेयकजबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का विभाजन कर दो हिस्सों में बांटा जाएगा।

निष्कर्ष:

डॉ. मोहन यादव सरकार के इन फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार एक तरफ जहाँ प्रदेश में निवेश और व्यापार को रफ्तार देने के मूड में है, वहीं सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा की गुणवत्ता और नागरिक अधिकारों को लेकर कानून व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाने जा रही है। मानसून सत्र में इन बिलों के पास होने के बाद मध्य प्रदेश में विकास और प्रशासन की एक नई रूपरेखा देखने को मिलेगी।