जम्मू। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मंगलवार को सरकारी तंत्र में पैठ बनाए बैठे 'सफेदपोश आतंकियों' के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है। प्रशासन ने जलशक्ति विभाग में कार्यरत तीन अस्थायी कर्मचारियों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और आतंकियों की सहायता करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।

सरकारी तंत्र की आड़ में रची जा रही थी साजिश

जांच में सामने आया है कि ये कर्मचारी सरकारी ओहदों का दुरुपयोग कर न केवल आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने (Safe Havens) मुहैया करा रहे थे, बल्कि हथियारों की तस्करी और वित्तीय सहायता जुटाने में भी सक्रिय थे। अधिकारियों के अनुसार, ये कर्मचारी आतंकियों के लिए 'ओवरग्राउंड वर्कर' (OGW) के रूप में काम कर रहे थे।

इनकी प्रमुख गतिविधियों में शामिल था:

सुरक्षाबलों की जासूसी: सुरक्षाबलों की आवाजाही और उनके ठिकानों की रेकी कर आतंकियों तक सटीक सूचनाएं पहुंचाना।

युवाओं को भड़काना: स्थानीय स्तर पर युवाओं को गुमराह कर आतंकी गुटों में भर्ती होने के लिए उकसाना।

राष्ट्रवादियों को चिह्नित करना: अलगाववादी एजेंडे का विरोध करने वाले राष्ट्रवादी नागरिकों की सूची तैयार करना।

कौन हैं ये बर्खास्त कर्मचारी?

प्रशासनिक जांच के बाद जिन तीन कर्मियों पर कार्रवाई की गई है, वे पिछले कुछ वर्षों से जेल में बंद हैं। उनकी पहचान इस प्रकार है:

शौकत जरगर: अनंतनाग निवासी (दैनिक वेतनभोगी)।

कौसर हुसैन: किश्तवाड़ निवासी (अस्थायी कर्मचारी)।

लियाकत अली: किश्तवाड़ निवासी (अस्थायी कर्मचारी)।

अधिकारियों का कथन: "पूरी जांच प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट हुआ कि ये तीनों सरकारी तंत्र का हिस्सा रहते हुए अलगाववादी एजेंडे को खाद-पानी दे रहे थे। इन पर यह कार्रवाई आतंक के इकोसिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त करने की हमारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।"

2019 से सलाखों के पीछे हैं आरोपी

गौरतलब है कि इन तीनों को वर्ष 2019 में सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। तब से ही इनके खिलाफ गहन जांच चल रही थी। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई ने उन तत्वों को कड़ा संदेश दिया है जो सरकारी सेवा में रहकर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।